देहरादून | अक्टूबर 2025
उत्तराखंड सरकार ने युवाओं की मांग और परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों के बाद बड़ा फैसला लिया है।
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा आयोजित विवादित परीक्षा को निरस्त (Cancel) कर दिया गया है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि यह परीक्षा अगले तीन महीनों में दोबारा आयोजित की जाएगी।.
क्या है पूरा मामला
21 सितंबर को हुई स्नातक स्तरीय परीक्षा को लेकर कई अभ्यर्थियों ने पेपर लीक और पारदर्शिता की कमी के आरोप लगाए थे।
जांच में कई अनियमितताएँ सामने आने के बाद आयोग ने परीक्षा को निरस्त करने का निर्णय लिया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को आयोग की सिफारिश भेजी गई थी, जिसके बाद उन्होंने तुरंत परीक्षा रद्द करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा —
“सरकार परीक्षाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ कराना चाहती है। अगर एक भी युवा के साथ अन्याय होता है, तो उसे ठीक करना हमारा कर्तव्य है।”
कब क्या हुआ — विवाद की टाइमलाइन
- 21 सितंबर: स्नातक स्तरीय परीक्षा हुई
- 24 सितंबर: अभ्यर्थियों ने पेपर लीक की शिकायत दर्ज कराई
- 27 सितंबर: आयोग ने प्रारंभिक जांच शुरू की
- 30 सितंबर: जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपी गई
- 12 अक्टूबर: परीक्षा निरस्त करने का फैसला
- अगले 3 महीने में: नई परीक्षा आयोजित की जाएगी
सीबीआई और एसआईटी की भूमिका
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई ने एसआईटी (Special Investigation Team) से रिपोर्ट मांगी है।
रिपोर्ट के आधार पर केंद्र और राज्य स्तर पर आगे की जांच की जाएगी।
एसआईटी ने परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े तकनीकी पहलुओं और लीक के संभावित स्रोतों की पड़ताल की है।
रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा — “युवाओं की मेहनत व्यर्थ नहीं जाएगी। हम पारदर्शी व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं। जिन लोगों ने परीक्षा की गरिमा को ठेस पहुँचाई है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।”
अभ्यर्थियों की प्रतिक्रिया
इस फैसले के बाद युवाओं ने राहत की सांस ली है।
कई अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया पर लिखा —
“यह निर्णय सही दिशा में एक कदम है। हम ईमानदार परीक्षा चाहते हैं, न कि राजनीति।”
हालांकि, कुछ छात्रों ने चिंता जताई कि दोबारा परीक्षा से उन्हें अतिरिक्त तैयारी करनी होगी, लेकिन अधिकांश ने इसे न्यायपूर्ण निर्णय बताया।
आगे की राह
- नई परीक्षा तीन महीने के भीतर आयोजित की जाएगी।
- उम्मीदवारों को दोबारा आवेदन नहीं करना पड़ेगा।
- पुराने एडमिट कार्ड अमान्य होंगे, नई परीक्षा तिथि और केंद्र जल्द घोषित किए जाएंगे।
- पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए परीक्षा में नई तकनीकी निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी।
निष्कर्ष:
उत्तराखंड सरकार का यह निर्णय युवाओं के विश्वास को बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पारदर्शी भर्ती प्रणाली ही युवाओं के भविष्य की गारंटी है — और यही “नई दिशा, नया उत्तराखंड” की असली पहचान है।
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