अदानी ग्रुप को मिला सोनप्रयाग–केदारनाथ रोपवे प्रोजेक्ट, 4,081 करोड़ रुपये का निवेश

Adani group company Ropway project in kedarnath

रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड। तीर्थनगरी केदारनाथ तक पहुँच अब आसान होने वाली है। अदानी ग्रुप की कंपनी Adani Enterprises Ltd को सरकार की ओर से सोनप्रयाग–केदारनाथ रोपवे प्रोजेक्ट का जिम्मा सौंपा गया है। यह प्रोजेक्ट लगभग ₹4,081 करोड़ की लागत से बनाया जाएगा और इसे पूरा होने में करीब 6 साल लगेंगे।

प्रोजेक्ट की खास बातें

  • लंबाई: करीब 12.9 किलोमीटर
  • मार्ग: सोनप्रयाग से सीधे केदारनाथ धाम तकनिवेश: 4,081 करोड़ रुपये
  • निर्माण समय: लगभग 6 वर्ष
  • क्षमता: प्रति घंटे प्रत्येक दिशा में लगभग 1,800 यात्रीयात्रा समय: मौजूदा 8–9 घंटे की कठिन यात्रा घटकर केवल 36 मिनट रह जाएगी
  • संचालन अवधि: निर्माण के बाद 29 साल तक अदानी ग्रुप इसका संचालन करेगा

क्या होगा फायदा?

  • तीर्थयात्रियों के लिए राहत – बुज़ुर्गों, बच्चों और महिलाओं को लंबा और कठिन ट्रेक नहीं करना पड़ेगा।
  • पर्यटन को बढ़ावा – इस प्रोजेक्ट से होटलों, दुकानों और स्थानीय व्यवसायों को नए अवसर मिलेंगे।
  • रोजगार – निर्माण और संचालन दोनों चरणों में हजारों स्थानीय लोगों को नौकरी मिलेगी।
  • सुरक्षा और सुविधा – बारिश, बर्फबारी और भूस्खलन जैसी चुनौतियों से बचकर सुरक्षित यात्रा संभव होगी।

चुनौतियाँ भी कम नहीं

  • पर्यावरणीय असर: हिमालयी इलाके में बड़े पैमाने पर निर्माण से जंगल, जल स्रोत और वन्यजीव प्रभावित हो सकते हैं।
  • स्थानीय निवासियों की चिंता: ज़मीन अधिग्रहण और पुराने तीर्थमार्गों की पहचान को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
  • टिकट दरें: यह सुनिश्चित करना होगा कि रोपवे की कीमत आम श्रद्धालुओं की जेब पर भारी न पड़े।
  • मौसम की मार: पहाड़ों में अचानक बदलते मौसम से निर्माण और संचालन पर असर पड़ सकता है।

सरकार की योजना के तहत

यह परियोजना केंद्र सरकार की राष्ट्रीय रोपवे विकास योजना – पर्वतमाला का हिस्सा है। इसका उद्देश्य कठिन पहाड़ी यात्राओं को सुरक्षित, तेज और आधुनिक परिवहन से जोड़ना है।

निष्कर्ष

सोनप्रयाग–केदारनाथ रोपवे उत्तराखंड के तीर्थयात्रियों और पर्यटन उद्योग के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकता है। यह न केवल श्रद्धालुओं की यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोज़गार को भी मजबूती देगा। हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच कितना संतुलन बनाया जा पाता है।

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