नई दिल्ली: 2025 में दुनिया भर में विश्व बैंक (World Bank / IBRD) से औद्योगिक एवं विकासात्मक ऋण लेने वाले देशों की सूची में भारत शीर्ष स्थान पर पहुँच गया है। इस वर्ष भारत पर इसके ऋण बकायों में वृद्धि हुई है और वह “विश्व बैंक का सबसे बड़ा कर्जदार देश” नाम से सुर्खियों में है।
ऋण की स्थिति और रैंकिंग
- रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2025 की शुरुआत तक भारत का बकाया ऋण लगभग 39.3 अरब डॉलर तक पहुँच गया है, जो विश्व बैंक द्वारा जारी ऋणों में सबसे अधिक है।
- इसके बाद इंडोनेशिया दूसरे स्थान पर है, भारत के मुकाबले कर्ज कम हैं।
- इस रैंकिंग का मतलब यह नहीं है कि भारत आर्थिक रूप से अस्वस्थ है, बल्कि यह दर्शाता है कि भारत ने विकास परियोजनाओं और बुनियादी ढाँचे में व्यापक निवेश के लिए बड़े स्तर पर विश्व बैंक के सहयोग का सहारा लिया है।
कारण एवं चुनौतियाँ
विश्लेषकों के अनुसार, भारत का यह शीर्ष दर्जा निम्न कारणों से है:
- बुनियादी ढाँचे पर उच्च निवेश: भारत ने सड़कों, ऊर्जा, जल प्रबंधन, शहरी विकास, शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर परियोजनाएँ आरंभ की हैं, जिनमें विश्व बैंक की सहायता ली गई है।
- वृद्धि की महत्वाकांक्षाएँ: सरकार ने 2047 तक “उच्च आय देश” बनने का लक्ष्य रखा है, जिसके कारण पूंजीगत निवेश की जरूरत अधिक है।
- अन्य विकासशील देशों की तुलना: अन्य विकासशील देशों की तुलना में भारत की परियोजना संख्या और ऋण लेने की प्रवृत्ति अधिक रही है।
- ऋण सेवा एवं पुनर्भुगतान: बकाया ऋण बढ़ने का एक दुष्परिणाम यह है कि ब्याज एवं पुनर्भुगतान दबाव अधिक होगा। यदि आर्थिक विकास अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाए, तो यह समस्याएँ बढ़ सकती हैं।

यह ग्राफ़ विश्व बैंक (World Bank) द्वारा जारी नवीनतम आँकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है, जिसमें वर्ष 2025 तक के सबसे बड़े कर्जदार (Top Borrower) देशों की स्थिति दर्शाई गई है।डेटा World Bank Finances One (IBRD + IDA Outstanding Loans, as of 31 August 2025) से लिया गया है और इसका विश्लेषण fDi Intelligence Report से भी सत्यापित किया गया है।ग्राफ़ में देखा जा सकता है कि भारत (India) US$ 39.3 बिलियन के साथ विश्व बैंक का सबसे बड़ा कर्जदार देश बना हुआ है। उसके बाद इंडोनेशिया, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देश क्रमशः दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान पर हैं।यह आँकड़े यह नहीं दर्शाते कि भारत की अर्थव्यवस्था कमजोर है, बल्कि यह दिखाते हैं कि भारत ने बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाओं (Infrastructure, Education, Health, Energy, Urban Development) के लिए विश्व बैंक की सहायता ली है।
राजकोषीय और बाह्य ऋण का परिदृश्य
- भारत की बाह्य देनदारी वर्ष 2024–25 के अंत तक लगभग ₹ 5,74,927.51 करोड़ थी।
- सरकार की कुल देनदारियाँ—आंतरिक और बाह्य—2025 में बढ़कर लगभग ₹ 185.27 लाख करोड़ हो गई हैं।
विशेषज्ञों की राय
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत को अपने विकास मॉडल में संतुलन बनाए रखना होगा:
- ऋण लेना ठीक है यदि वह उच्च लाभदायक परियोजनाओं में लगाया जाए।
- वृद्धि दर (growth rate) को बनाए रखना जरूरी है, ताकि ऋण सेवा का दबाव बढ़ने पर वह वहन-योग्य रहे।
- सरकार को रणनीतिक निवेश, कुशल उपयोग और पारदर्शिता बढ़ानी होगी।
निष्कर्ष
2025 में भारत ने विश्व बैंक से सबसे ज़्यादा ऋण लेने वाले देशों की सूची में अव्वल स्थान प्राप्त कर लिया है। यह स्थिति देश की विकास महत्वाकांक्षा और निवेश की तीव्रता को दर्शाती है। लेकिन आगे की चुनौतियाँ—ऋण सेवा की क्षमता, निवेश की गुणवत्ता, और वित्तीय स्थिरता—नज़रअंदाज़ नहीं की जा सकतीं।






