हमास क्या है? जानिए इसके इतिहास, संगठन का गठन, विचारधारा, सशस्त्र गतिविधियां और इजरायल के साथ संघर्ष की पूरी कहानी हिंदी में।
हमास HAMAS क्या है ?
हमास, जिसका पूरा नाम “हरकत अल-मुक़ावमा अल-इस्लामिया” (इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन) है, एक फिलिस्तीनी सुन्नी इस्लामिस्ट राजनीतिक और सशस्त्र संगठन है। इसे 1987 में शेख अहमद यासीन ने स्थापित किया था, और यह आज गाजा पट्टी पर शासन कर रहा है। हमास के गठन का मकसद फिलिस्तीनी अधिकारों की रक्षा और इजरायल के कब्जे का विरोध करना है। इस संगठन ने अपनी सशस्त्र शाखा, अल-क़सम ब्रिगेड्स, के माध्यम से कई हमलों को अंजाम दिया है जो कि अक्सर इजरायल के खिलाफ प्रतिरोध के नाम पर किए जाते हैं।
हमास का इतिहास और स्थापना
1987 में पहली फिलिस्तीनी इंतिफादा (विद्रोह) के दौरान, शेख अहमद यासीन ने गाजा पट्टी में मुस्लिम ब्रदरहुड की राजनीतिक शाखा के रूप में हमास की स्थापना की। मुस्लिम ब्रदरहुड की यह शाखा फिलिस्तीनी समाज में इस्लामी आधार पर राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव बढ़ाने के लिए बनाई गई थी। शुरूआत में, हमास की गतिविधियां मुख्यतः इस्लामी धर्म और फिलिस्तीनी अधिकारों की रक्षा के इर्द-गिर्द केंद्रित थीं, लेकिन जल्दी ही इसका एक सशस्त्र संगठन भी बन गया।
शेख अहमद यासीन, जो व्हीलचेयर पर थे क्योंकि वे बचपन में घायल हो चुके थे, ने हमास को एक धार्मिक एवं राजनीतिक संगठन के रूप में स्थापित किया। 1992 में हमास के सशस्त्र विंग, “इज अल-दीन अल-कसम ब्रिगेड”, का गठन हुआ जो इजरायल के खिलाफ आतंकवादी हमलों में सक्रिय रहा।
विचारधारा और उद्देश्य
हमास की विचारधारा मुस्लिम ब्रदरहुड की इस्लामी राजनीतिक और सामाजिक विचारधारा पर आधारित है। इसका मुख्य उद्देश्य फिलिस्तीन की आज़ादी और मुसलमानों का अधिकार प्राप्त करना है, और वह इज़राइल को एक अवैध राज्य मानता है। वह इस इलाके में इस्लामी समाज की स्थापना की बात करता है।
- इजरायल को मान्यता नहीं: हमास दर्शाता है कि वह इजरायल को मान्यता नहीं देता और पूरे फिलिस्तीनी भूभाग पर अपना शासन स्थापित करना चाहता है।
- इस्लामी शासन: एक कट्टरपंथी सोच के तहत, हमास इस्लामी कानून के आधार पर शासन की पैरवी करता है।
- सशस्त्र प्रतिरोध: वह केवल राजनीतिक संघर्ष पर भरोसा नहीं करता, बल्कि इसे सशस्त्र प्रतिरोध के माध्यम से लड़ने की नीति अपनाता है।
राजनीतिक और सैन्य गतिविधियां
हमास 2006 के फिलिस्तीनी संसदीय चुनावों में एक बड़ी जीत हासिल करके फिलिस्तीनी राजनीति में प्रमुख शक्ति बन गया। इसके बाद 2007 में, गाजा पट्टी में फतह के मुकाबले उसने सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया और स्वतन्त्र शासन स्थापित किया। तब से गाजा पट्टी का प्रशासन हमास के नियंत्रण में है, जबकि वेस्ट बैंक फिलिस्तीनी राष्ट्रीय प्राधिकरण के अधीन है।
हमास का सशस्त्र विंग, अल-क़सम ब्रिगेड्स, इजरायल में बंदूकधारी और आत्मघाती हमले करने के लिए जाना जाता है। 1993 के ओस्लो समझौते के बाद भी हमास ने इजरायल के खिलाफ हिंसक गतिविधियाँ जारी रखीं। यह संगठन कई बार इजरायल के खिलाफ बड़े पैमाने पर रॉकेट हमले कर चुका है, तथा इससे दोनों पक्षों के बीच कई युद्ध छिड़े हैं, जैसे कि 2008-09, 2012, 2014, 2021, और हालिया 2023 के संघर्ष।
हमास और इजरायल संघर्ष

हमास और इजरायल के बीच दशकों से संघर्ष जारी है। अक्टूबर 2023 में हमास द्वारा इजरायल पर बड़े पैमाने पर हुए आक्रमण ने क्षेत्र में एक नए युद्ध को जन्म दिया। इस हमले में हजारों नागरिक मारे गए और इसके बाद इजरायल ने जोरदार जवाबी कार्रवाई की। दोनों पक्षों के बीच लगातार मिसाइल हमले और हवाई हमले हो रहे हैं, जिसके कारण गाजा पट्टी में मानवाधिकार संकट और भारी तबाही मची हुई है।
हमास की वित्तीय और बाहरी सहायता
हमास को कई मुस्लिम देशों से वित्तीय सहायता मिलती है, जिसमें विशेष रूप से ईरान का समर्थन उल्लेखनीय है। इसके अलावा, कई गैर-सरकारी इस्लामिक चैरिटी संस्थाएं और फिलिस्तीनी प्रवासी योद्धाओं से भी धन प्राप्त होता है। यह वित्तीय सहायता हमास को हथियार खरीदने, सशस्त्र लड़ाकों को प्रशिक्षित करने और नागरिक परियोजनाओं को चलाने में मदद करती है।
हमास के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
हमास को कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने आतंकवादी संगठन घोषित किया है। इजरायल, अमेरिका, यूरोपीय संघ और कई अन्य देशों ने इसे आतंकवाद का आरोपी माना है। वहीं, कुछ देशों और संगठनों के लिए हमास एक विघटित राष्ट्र की स्वतंत्रता संग्राम का प्रतिनिधि भी है। इस विरोधाभास ने मध्य पूर्व संघर्ष को और अधिक जटिल बना दिया है।
दोषपूर्ण और विवादित भूमिका
हमास को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मतभेद हैं। एक ओर इसे आतंकवादी संगठन माना जाता है, वहीं दूसरी ओर यह फिलिस्तीनी समाज में सामाजिक और राजनीतिक सुधार के लिए कार्य करता है। गाजा में इसके द्वारा स्थापित स्कूल, अस्पताल और सामाजिक कार्यक्रम नागरिकों के लिए मददगार साबित हुए हैं। हालांकि, इसके हिंसक तरीकों ने क्षेत्र में व्यापक विनाश और मानवीय संकट पैदा किया है।
वर्तमान स्थिति
अक्टूबर 2023 के हमास आक्रमण के बाद ग़ज़ा पट्टी में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण है। हमास अभी भी सशस्त्र संघर्ष में लगा हुआ है और इजरायल ने गाजा की ज़मीन, समुद्र और हवाई मार्ग से कड़ी नाकेबंदी लागू कर रखी है। भविष्य में इस संघर्ष का समाधान अभी दिखाई नहीं देता, लेकिन मध्य पूर्व क्षेत्र में शांति के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयास जारी हैं।
निष्कर्ष
हमास फिलिस्तीनी इतिहास और राजनीति का एक प्रभावशाली लेकिन विवादित हिस्सा है। इसकी स्थापना मुस्लिम ब्रदरहुड की विचारधारा और फिलिस्तीनी संघर्ष के जवाब में हुई, जो जल्द ही सशस्त्र प्रतिरोध का पर्याय बन गया। इसके राजनीतिक और सैन्य तरीकों ने क्षेत्र में कई बार युद्ध और तबाही को जन्म दिया है, लेकिन यह फिलिस्तीनी लोगों के बीच अपनी लोकप्रियता भी बनाए हुए है। मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए हमास और इजरायल के बीच सार्थक संवाद और समाधान आवश्यक है।
हमास क्या है और इसकी स्थापना कैसे हुई?
हमास, जिसका पूरा नाम हरकत अल-मुक़ावमा अल-इस्लामिया है, 1987 में शेख अहमद यासीन द्वारा प्रथम फिलिस्तीनी इंतिफादा के दौरान गठित किया गया था। यह मुस्लिम ब्रदरहुड की शाखा से उत्पन्न हुआ
गाजा में हमास की सामाजिक सेवाएं क्या हैं?
हमास गाजा में स्कूलों, अस्पतालों जैसी सामाजिक सेवाएं चलाता है, जो उसकी लोकप्रियता में मदद करती हैं
हमास के मुख्य अंतरराष्ट्रीय समर्थक कौन हैं?
हमास को ईरान और लेबनान के हिजबुल्लाह से महत्वपूर्ण समर्थन मिलता है
गाजा पट्टी में हमास की भूमिका क्या है?
हमास ने 2007 से गाजा पर शासन किया है और यहां सरकार चलाता है
What is the relationship between Hamas and Iran?
Iran provides Hamas with significant financial, military, and political support. Iran is seen as a strategic partner, using Hamas and other proxy groups to extend its influence in the region.






