बॉलीवुड के दिग्गज हास्य कलाकार गोवर्धन असरानी (Asrani) का 20 अक्टूबर 2025 को 84 वर्ष की आयु में निधन। अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हुआ; आखिरी संस्कार सांताक्रूज़ क्रेमेटोरियम पर किए गए। पढ़ें उनकी ज़िन्दगी, करियर, यादगार भूमिकाएँ और इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया।
🎭 गोवर्धन असरानी: एक जीवंत हास्य कलाकार की यात्रा
गोवर्धन असरानी का जन्म 1 जनवरी 1941 को जयपुर, राजस्थान में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सेंट जेवियर्स स्कूल, जयपुर से प्राप्त की और बाद में राजस्थान कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। अभिनय में रुचि रखने वाले असरानी ने 1960 से 1962 तक साहित्य कला भाई ठाक्कर से अभिनय की शिक्षा ली और फिर पुणे स्थित फिल्म और टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) में दाखिला लिया, जहाँ से उन्होंने 1966 में स्नातक की डिग्री प्राप्त की
असरानी ने 1967 में फिल्म ‘हरे कांच की चूड़ियां‘ से बॉलीवुड में कदम रखा। हालाँकि, उन्हें पहचान 1969 में आई फिल्म ‘सत्यकाम’ से मिली, जिसमें उन्होंने सहायक भूमिका निभाई। इसके बाद, उन्होंने ‘मेरा अपना’, ‘नमक हलाल’, ‘शोले’, ‘चुपके चुपके’, ‘भूल भुलैया’ जैसी कई हिट फिल्मों में अपनी अदाकारी से दर्शकों का दिल जीता।
मौत की स्थिति — मेडिकल और विस्तार
रिपोर्ट के मुताबिक असरानी को कुछ दिनों पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उन्हें सांस लेने में परेशानी थी — यह बीमारी कुछ समय से चली आ रही थी और अंततः सोमवार को उनका निधन हो गया। उन्होंने अस्पताल में अंतिम दिनों तक फैंस को दीवाली की शुभकामनाएं भी एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी थीं—यह खबर उनकी फैंस के लिए बेहद भावुक पल साबित हुई।
फिल्मी करियर
असरानी ने 1967 में फिल्म ‘हारे कांच की चूड़ियां’ से अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद, उन्होंने कई फिल्मों में सहायक अभिनेता के रूप में अभिनय किया, लेकिन 1970 के दशक में उनकी हास्य भूमिकाओं ने उन्हें पहचान दिलाई। ‘शोले’ में जेलर की भूमिका, ‘चुपके चुपके’ में उनके द्वारा निभाया गया किरदार, और ‘आज़ की ताज़ा ख़बर’ में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा।
निर्देशन और अन्य योगदान
असरानी ने निर्देशन में भी कदम रखा और ‘हम नहीं सुधरेंगे’ (1980), ‘अमदाबाद नो रिक्शावाला’ (1990) और ‘उड़ान’ (1997) जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। इसके अलावा, उन्होंने ‘द लायन किंग’ के हिंदी संस्करण में ज़ाज़ू का किरदार भी निभाया।
🏆 पुरस्कार और सम्मान
असरानी को उनकी उत्कृष्ट हास्य अदाकारी के लिए कई पुरस्कार मिले, जिनमें 1974 में ‘आज़ की ताज़ा ख़बर’ के लिए फिल्मफेयर अवार्ड शामिल है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने 1986 में ‘सात क़ैदी’ के लिए गुजरात राज्य सरकार से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और निर्देशक का पुरस्कार भी प्राप्त किया
व्यक्तिगत जीवन
असरानी ने अभिनेत्री मंजू बंसल से विवाह किया, जिनसे उनकी मुलाकात ‘आज़ की ताज़ा ख़बर’ और ‘नमक हलाल’ जैसी फिल्मों के दौरान हुई थी। उनके एक संतान भी हैं।
निधन और अंतिम संस्कार
असरानी का निधन 20 अक्टूबर 2025 को मुंबई में हुआ। उनके निधन की सूचना उनके प्रबंधक ने दी, जिन्होंने बताया कि वे श्वसन संबंधी समस्याओं के कारण अस्पताल में भर्ती थे। उनका अंतिम संस्कार सांताक्रूज़ श्मशान घाट पर परिवार और करीबी दोस्तों की उपस्थिति में किया गया।
अंतिम संदेश
असरानी ने अपने निधन से कुछ घंटे पहले ही सोशल मीडिया पर अपने प्रशंसकों को दीपावली की शुभकामनाएँ दी थीं। उनका यह अंतिम संदेश उनके सकारात्मक और खुशमिजाज व्यक्तित्व का प्रतीक था।
विरासत और यादें
गोवर्धन असरानी ने भारतीय सिनेमा में हास्य अभिनय की एक नई परिभाषा स्थापित की। उनकी अदाकारी, संवाद अदायगी और समय की समझ ने उन्हें एक अमिट पहचान दिलाई। उनकी अनुपस्थिति भारतीय फिल्म उद्योग के लिए एक अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनकी फिल्मों और यादों के रूप में वे हमेशा हमारे बीच जीवित रहेंगे।
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