छठ पूजा (chhat puja) एक प्रसिद्ध हिंदू त्योहार है जिसे खास तौर पर उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में सूर्य-देवता की आराधना के रूप में मनाया जाता है। चार दिन चलने वाला यह त्योहार प्रकृति, महिलाओं की शक्ति और जल-जीवन से गहराई से जुड़ा होता है।
छठ पूजा (Chhat Puja), सूर्य देव और छठी मैया की आराधना का अद्भुत पर्व है, जो विशेष रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तरप्रदेश और नेपाल में मनाया जाता है। यह त्योहार जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, स्वास्थ्य, समृद्धि, और सामुदायिक सद्भाव का प्रतीक है। 2025 में छठ पूजा का आयोजन कार्तिक शुक्ल षष्ठी के अनुसार अक्टूबर के अंत में होगा, जो परंपरागत रूप से चार दिनों तक चलेगा।
छठ पूजा के दौरान प्रासंगिक अंक
- छठ पूजा का व्रत निर्जला (36 घंटे) रखा जाता है, जिसे कठिनतम व्रतों में माना जाता है।
- यह व्रत परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की लंबी आयु और स्वास्थ्य की कामना से किया जाता है।
- छठ पूजा में साथ मिलकर उपवास और पूजा करने की परंपरा से पारिवारिक और सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं।
छठ पूजा 2025: तिथियों का संक्षिप्त सारांश
| अनुष्ठान | तिथि | दिन |
|---|---|---|
| नहाय खाय: नदी, तालाब या कुंए में स्नान कर पवित्रता ग्रहण करना। सात्विक भोजन करना। | 25 अक्टूबर 2025 | शनिवार |
| खरना: निर्जला उपवास रखना तथा शाम को गुड़-खीर, रोटी और फल का प्रसाद ग्रहण। | 26 अक्टूबर 2025 | रविवार |
| संध्या अर्घ्य: सूर्यास्त के समय जलाशय के किनारे जाकर सूर्य को अर्घ्य देना, यह छठ पूजा का मुख्य दिन होता है। | 27 अक्टूबर 2025 | सोमवार |
| प्रातः अर्घ्य: उगते सूर्य को अर्घ्य देना और व्रत का पारण करना। इस दिन व्रती अपने उपवास को पूरा करते हैं। | 28 अक्टूबर 2025 | मंगलवार |
इतिहास और पौराणिक कथन (Chhat Pooja History and Mythology)
- कहा जाता है कि जब सीता और राम जी ने रावण पर विजय पाकर अयोध्या लौटे, तो सीता ने सूर्य को अर्घ्य देकर छठ व्रत किया था।
- द्रौपदी ने और कर्ण ने भी छठ पूजा का व्रत रखा था, जैसा महाभारत आदि ग्रंथों में वर्णित है।
- origins: छठ पूजा का उल्लेख वेदों और स्मृति साहित्य में समय-समय पर मिलता है; कई ग्रंथों में सूर्य-पूजा का उल्लेख है, खासकर किसानों और जल स्रोतों से जुड़े समुदायों के बीच।
- mythological associations: सूर्योदय और अर्ध्य (अरघ्य) की परंपरा सूर्यदेव की आशीर्वाद पाने के लिए है; कुछ कथाओं में मत्स्य, भैरवी और अन्य प्रतीकों के रूपक मिलते हैं, जो प्रकृति के चक्र और जल-स्रोतों के संरक्षण से जुड़ते हैं।
- regional variations: उत्तर भारत के विभिन्न इलाकों (बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के मैथिली-मधेशिया) में यह पर्व अलग-अलग भंगिमाओं के साथ मनाया जाता है—शोध-आधारित अनुशीलन में चठ पूजा के बहुधर्मी स्वरूपों का मिलाजुला वर्णन मिलता है।
धार्मिक मान्यताएं और उपासना (Religious Beliefs and Devotional Practices)

- सूर्योदय-उपासन: सूर्य देव को उषःकाल में अर्घ्य देकर आराधना।
- प्रकृति और प्रकृतिमहत्व: पूजा सुगमता से जल-प्रवाह, बिहार-पूर्वी भारत की नदी-घाटों के मंदिर-स्थलों से जुड़ी है; यह प्रकृति-आधारित आस्था का प्रतीक भी है।
- व्रत और उपवास: व्यापक रूप से महिलाओं द्वारा एक निष्ठावान व्रत रखा जाता है; पुरुष भी भाग लेते हैं, पर महिलाएं प्रमुख भूमिका निभाती हैं।
- आयु-सम्बन्धी लाभ: माना जाता है कि स्पष्ट आचरण, स्वास्थ्य और परिवार के खुशहाल जीवन के लिए यह पूजा मंगलकारी है।
- सामाजिक समरसता: छठ में सामाजिक बंधन, सहयोग और दान-धर्म की भावना मजबूत होती है; मिलजुलकर गीत-वंदना और आराधना एक साथ होती है।
- महिला सशक्तिकरण: पूजा में मुख्य रूप से महिलाएं सक्रिय भूमिका निभाती हैं, जो उनकी सामाजिक सम्मान और सशक्तिकरण का उदाहरण है।
तिथि, इतिहास-आधारित विवरण और कैलेंडर
- किस समय मनाई जाती है: छठ पूजा कार्तिक सङ्कट के आसपास (खगोल-चक्र के अनुसार) और सूर्य-उदय से सूर्य-अस्त तक चलती है।
- चार दिन की परंपरा:
- नहाय-खाय (महिलाओं के स्नान-पूजा और व्रत-निर्वाह)
- खरना (रात के समय भोजन नहीं खाने का व्रत, एक विशेष अन्न-रचना)
- संध्या-पाठ (सूर्यास्त के पहले डूबते सूर्य को अर्घ्य)
- उगना-उगना (भोर में उगते सूर्य को अर्घ्य और प्रसाद)
- क्षेत्रीय विविधता: नदी-घाट, तालाब-किनारे, गाँव-घर में पूजा की विविध परंपराएं देखी जा सकती हैं; बिहार के घाट-स्थलों पर अधिक श्रद्धालु जुटते हैं।
रीति-रिवाज और पूजा-विधि
- उद्गाटन और तैयारी
- साफ-सफाई: घाट-घाट, तालाब, नदी किनारे स्वच्छता सबसे पहले
- पारंपरिक पीतल/कांच के बर्तन, डिज़ाइन-युक्त पंखे और दीपकों का प्रयोग
- खरना की रस्म
- mujer-देव, चावल/दाल का पक्का प्रसाद, जल-भरे लोटे
- सूर्यกลับ आने के पहले भोजन का उपवास
- संध्या-आराधना
- सूर्यास्त से पहले आह्वान, प्रार्थना-संदेश, गीत-भजन
- इयार-घट, चढ़ाव, नैन-नयन ज्योति-आराधना
- प्रातःकालीन आराधना
- उगते सूर्य को अर्घ्य
- महिलाएं और पुरुष हाथ में ठंडी धूप-जल से भरे हुए लोटे
- प्रसाद और सेवन
- ठेकुआ, लावा, फरा, बनारसी पान, संदेह-युक्त मीठे पेस्ट
- प्रसाद का वितरण और दान-धर्म
- सुरक्षा और स्वच्छता
- जल स्रोतों की स्वच्छता का खास ध्यान
- प्लास्टिक-घटक से बचना और जल-जीवन के प्रति सम्मान

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छठ पूजा 2025 कब है?
छठ पूजा 2025 की शुरुआत 25 अक्टूबर (शनिवार) से होगी और इसका समापन 28 अक्टूबर (मंगलवार) को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होगा।
छठ पूजा कितने दिनों तक चलती है?
यह पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है – नहाय खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और प्रातः अर्घ्य के रूप में।
छठ पूजा का मुख्य दिन कौन-सा होता है?
तीसरा दिन यानी संध्या अर्घ्य सबसे महत्वपूर्ण होता है, जब व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
छठ पूजा का धार्मिक महत्व क्या है?
यह पूजा सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है। यह शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि के साथ-साथ परिवार की समृद्धि और स्वास्थ्य का प्रतीक है।
छठ पूजा में क्या-क्या प्रसाद चढ़ाया जाता है?
प्रमुख प्रसाद में ठेकुआ, फल (केला, नारियल, सिंघाड़ा), खीर, और सूप में सजाए गए फल-फूल शामिल हैं।
छठ पूजा 2025 का अर्घ्य देने का शुभ मुहूर्त क्या है?
संध्या अर्घ्य: 27 अक्टूबर को शाम 5:10 से 5:58 बजे के बीच।
प्रातः अर्घ्य: 28 अक्टूबर को सुबह 5:33 से 6:30 बजे के बीच।
छठ पूजा कौन-कौन से राज्यों में प्रमुखता से मनाई जाती है?
मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में यह पर्व बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
छठ पूजा के दौरान महिलाएं क्या करती हैं?
महिलाएं (व्रती) निर्जला उपवास रखती हैं, घाट पर सूर्य देव को अर्घ्य देती हैं, और परिवार की भलाई की प्रार्थना करती हैं। यह महिला सशक्तिकरण और आस्था का प्रतीक है।
छठ पूजा के लोकप्रिय भक्ति गीत कौन-से हैं?
“कांच ही बांस के बहंगिया”, “छठी मईया आयल बाड़ू अंगना में”, और “उग हे सूरज देव” जैसे गीत सबसे अधिक लोकप्रिय हैं, जो आस्था और संस्कृति को जीवंत करते हैं।






