बद्रीनाथ में टूटा बर्फबारी का रिकॉर्ड: 40 साल बाद अक्टूबर में जमी मोटी बर्फ की परत

बद्रीनाथ में 40 साल बाद टूटा बर्फबारी का रिकॉर्ड Snowfall at badrinath

उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बद्रीनाथ धाम में इस साल मौसम ने ऐसा करवट ली कि 40 साल पुराना बर्फबारी का रिकॉर्ड टूट गया। 7 अक्टूबर को हुई जबरदस्त बर्फबारी ने 1984 की ऐतिहासिक बर्फबारी को पीछे छोड़ दिया। इस अप्रत्याशित मौसम परिवर्तन से पूरा क्षेत्र सफेद चादर में ढक गया और तापमान शून्य से नीचे चला गया। स्थानीय लोगों और यात्रियों दोनों ने दशकों बाद ऐसा नजारा देखा, जब मंदिर परिसर और आसपास की पहाड़ियां बर्फ से लद गईं। प्रशासन ने तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किए, जबकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और बर्फबारी की संभावना जताई है।

बदला मौसम, टूटा 40 साल पुराना रिकॉर्ड

बद्रीनाथ धाम में इस बार अक्टूबर माह में बर्फबारी का ऐसा नजारा देखने को मिला जो पिछले 40 वर्षों में नहीं हुआ था। मौसम विभाग के अनुसार, बद्रीनाथ में 7 अक्टूबर को भारी बर्फबारी दर्ज की गई, जिसने वर्ष 1984 के बाद का रिकॉर्ड तोड़ दिया। इस अप्रत्याशित बर्फबारी ने न केवल तापमान को माइनस में पहुंचा दिया, बल्कि यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर दीं।

हेमकुंड साहिब में दो फीट से अधिक बर्फ

हेमकुंड साहिब बर्फबारी
Snowfall at hemkund sahib

हेमकुंड साहिब में मंगलवार को तापमान माइनस तीन डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। यहां दो फीट से अधिक बर्फ जमने से रास्ते बंद हो गए और यात्रियों को वापस लौटना पड़ा। हेमकुंड साहिब, जो 15 अक्टूबर के बाद बंद होने की प्रक्रिया में होता है, वहां अचानक हुई इस भारी बर्फबारी से श्रद्धालुओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।

यात्रियों को वापस लौटना पड़ा

मंगलवार को जब मौसम अचानक खराब हुआ, तब कई यात्री हेमकुंड और बद्रीनाथ की ओर बढ़ रहे थे। दोपहर बाद तेज़ बर्फबारी शुरू हो गई और सड़कों पर बर्फ की मोटी परत जमने लगी। इससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। बद्रीनाथ और हेमकुंड के बीच का मार्ग फिसलन भरा हो गया, जिसके कारण प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रुकने की सलाह दी।

मौसम वैज्ञानिकों की राय

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोबल क्लाइमेट चेंज के चलते उत्तराखंड जैसे हिमालयी क्षेत्रों में मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। सामान्यतया नवंबर-दिसंबर में होने वाली बर्फबारी अब अक्टूबर के मध्य में देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार पश्चिमी विक्षोभ और ठंडी हवाओं के कारण बर्फबारी सामान्य से पहले शुरू हुई।

यात्रा पर असर

बद्रीनाथ और हेमकुंड की बर्फबारी का सीधा असर तीर्थयात्रा पर पड़ा। बद्रीनाथ धाम में इस समय सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद हैं, जो दर्शन करने पहुंचे थे। हालांकि, मंदिर प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित

तापमान माइनस में, बढ़ी ठंड

हेमकुंड में माइनस तीन डिग्री और बद्रीनाथ में शून्य से नीचे तापमान दर्ज किया गया। इस ठंड के कारण स्थानीय निवासियों ने जल्दी ही सर्दियों की तैयारियां शुरू कर दी हैं।

बद्रीनाथ की बर्फबारी के ऐतिहासिक पल

1984 के बाद यह पहली बार है जब बद्रीनाथ धाम में अक्टूबर के मध्य में इतनी भारी बर्फबारी हुई। इससे पहले इस समय तक मौसम सामान्य और यात्रा सुचारू रहती थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, उन्होंने दशकों बाद ऐसा नजारा देखा है जब मंदिर परिसर तक बर्फ की सफेद चादर बिछ गई।

प्रशासन की चेतावनी

चमोली जिला प्रशासन ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे बिना मौसम की जानकारी के ऊंचाई वाले क्षेत्रों की यात्रा न करें। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और बर्फबारी की संभावना जताई है, जिससे मार्ग अवरुद्ध हो सकते हैं।

निष्कर्ष

बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब में हुई यह रिकॉर्डतोड़ बर्फबारी उत्तराखंड के बदलते मौसम की एक बड़ी मिसाल है। हालांकि इस बर्फबारी ने प्राकृतिक सुंदरता को और भी मनमोहक बना दिया है, लेकिन तीर्थयात्रियों और प्रशासन दोनों के लिए चुनौती भी बढ़ाई है। आने वाले वर्षों में ऐसे मौसमीय बदलाव जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव की ओर संकेत कर रहे हैं।

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