पहाड़ी माइक ब्यूरो: आज देश में हालात इतने विचित्र हो चुके हैं कि दिल्ली से लंदन या दिल्ली से न्यूयार्क की फ्लाइट 35,000 से भी कम की पड़ रही है, लेकिन दिल्ली-हैदराबाद, मुंबई व अन्य शहरों की टिकट 80,000 तक बिकी।
IndiGo के बड़े ऑपरेशनल संकट ने हज़ारों यात्रियों की प्लानिंग, पैसे और धैर्य — तीनों को तोड़कर रख दिया है।
एयरपोर्ट्स पर अफरा-तफरी, लंबी कतारें, मिस्ड फ्लाइट्स और आसमान छूते किरायों ने हवाई यात्रा को एक बुरे सपने में बदल दिया है।
6 दिसंबर को दिल्ली से लंदन की फ्लाइट ₹27,000 में मिल रही है, लेकिन दिल्ली से मुंबई की फ्लाइट ₹80,000 तक पहुँच गई है। जी हां, यह कोई टाइपो या मज़ाक नहीं — यह वही देश है जहाँ घरेलू उड़ानें हमेशा “सस्ती” कही जाती थीं। और यह सिर्फ एक उदाहरण भर है। देश के लगभग हर बड़े शहर — मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता, पुणे, गोवा — सभी रूट्स पर ऐसा लगता है जैसे हवाई किराया “ओपन लूट मार्केट” में बदल गया हो।
IndiGo के ऑपरेशनल संकट ने हज़ारों यात्रियों की ज़िंदगी अस्त-व्यस्त कर दी है — किसी की कनेक्टिंग इंटरनेशनल फ्लाइट मिस हो गई, किसी का सालों की तैयारी वाला एग्ज़ाम छूट गया, किसी का पारिवारिक फंक्शन, शादी, तिलक, मुंडन तक रद्द करना पड़ा, और कईयों का बिज़नेस सीधा घाटे में चला गया।
एयरपोर्ट्स पर हालात ऐसे हैं जैसे किसी आपदा में राहत कैंप लगे हों — लंबी लाइनें, गुस्सा, थकान, रोते बच्चे, परेशान परिवार, और कहीं से कोई साफ-सुथरी जानकारी नहीं।
और सबसे चिंताजनक बात?
संकट इतना बड़ा है… लेकिन सरकार अब तक खामोश है।
देश की 65% हवाई सेवा संभालने वाली एयरलाइन के ढहने से पूरे एविएशन सेक्टर में जो भूचाल आया है — उसकी असली कहानी अब शुरू होती है…
क्राइसिस की जड़: क्यों इतनी फ्लाइट्स रद्द और देरी हुईं?
नया नियम: DGCA का FDTL और क्रू-शेड्यूलिंग का धक्का
- सरकार और DGCA ने नए FDTL (Flight Duty Time Limitation) नियम लागू किए — जिसके तहत पायलट और क्रू को अब अधिक आराम (weekly rest), सीमित रात की लैंडिंग, और ड्यूटी-टाइम लिमिट के दायरे में रहकर काम करना होगा।
- इन नियमों का उद्देश्य सही था — पायलट fatigue कम करना, सुरक्षा बढ़ाना। लेकिन समस्या यह हुई कि जिन एयरलाइन्स का नेटवर्क बहुत बड़ा हो, जो बहुत सारी नाइट फ्लाइट्स और रेड-आई शेड्यूल पर निर्भर हों — उनकी तैयारी अगर समय पर न हुई हो — तो असर ख़तरनाक होता है। IndiGo भी ऐसा ही था।
IndiGo की तैयारी नाकाफी — Crew Shortage और Management Failure
- विशेषज्ञों का कहना है कि IndiGo नए नियमों के लागू होने से पहले पर्याप्त पायलट/क्रू भर्ती या शिफ्ट-रोटेशन ठीक से नहीं कर पाया। दूसरे घरेलू एयरलाइन्स ने– जो कम फ्लाइट्स चलाते थे — अपनी योजना बदल ली; लेकिन IndiGo की विशाल उड़ान नेटवर्क और रात-नाइट-शेड्यूल की संरचना के चलते वह सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ।
- DGCA ने भी स्वीकार किया कि IndiGo की “planning gap” (योजना एवं व्यवस्थापन में चूक) इस संकट की मुख्य वजह है।
तबाही — उड़ान रद्दीकरण, अफरा-तफरी और यात्रियों की बेहाली
- केवल 4 दिसंबर, 2025 को ही IndiGo ने लगभग 550+ उड़ानें रद्द कर दीं।
- इसके अगले दिन यानी 5 दिसंबर को — डाटा के मुताबिक — 700–1000+ फ्लाइट्स ग्राउंड हुईं।
- देश के प्रमुख हवाई अड्डों — दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, पुणे, चेन्नई — पर यात्रियों की भीड़, लंबी कतारें, चारों ओर गुस्सा, असमंजस।
- कई यात्रियों की कनेक्टिंग फ्लाइट्स मिस हुईं, कुछ इंटरनेशनल यात्राएँ रद्द हो गयीं, किसी का एग्ज़ाम छूट गया, तो किसी फैमिली फंक्शन या बिज़नेस मीटिंग — सब तहस-नहस।
“Flights cancelled, nobody to help — stranded with luggage at midnight,” कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर शिकायत की।
- ऑनलाइन टिकटों की भारी मांग और कम सीटें — नतीजा: किराया आसमान छू गया। कुछ रूट्स पर एकतरफ़ा टिकट ₹40,000–₹80,000 तक बिकते देखे गए।
सरकार, DGCA, IndiGo: जब जिम्मेदारी बनी बहाना
- केंद्र ने इस पूरे संकट की जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय 4-सदस्यीय जाँच समिति गठित की है। उद्देश्य — यह पता लगाना कि कहाँ चूक हुई, कौन जवाबदेह है, और भविष्य में ऐसा फिर न हो। source
- DGCA ने, बढ़ते दबाव और यात्रियों की मुश्किलों को देखते हुए, FDTL नियमों में से कुछ — विशेष रूप से नाइट-ड्यूटी और साप्ताहिक रेस्ट से जुड़ी पाबंदियाँ — अस्थायी रूप से वापस ले ली हैं।
- IndiGo ने प्रभावित यात्रियों को रिफंड / रि-शेड्यूलिंग / वैकल्पिक फ्लाइट का वादा किया है। साथ ही कहा है कि वह धीरे-धीरे अपना शेड्यूल सुधार रही है।
लेकिन — सवाल अभी बरकरार है:
क्या इतनी बड़ी एयरलाइन, इतने संसाधनों के साथ, समय रहते सुधार नहीं कर सकती थी? क्या नियमों की तैयारी नहीं थी?
ये संकट क्यों सिर्फ IndiGo तक सीमित नहीं — और ये पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है
- जब एक एयरलाइन के पास देश की औसत 60–65% हवाई यात्री आवाजाही का दबदबा हो, तो उसकी अस्थिरता पूरे वायुव्यवसाय को हिला देती है। यात्रियों के पास विकल्प सीमित होते हैं, किराया ऊपर जाता है, और यात्रा पर भरोसा टूटता है।
- नए safety / duty-rest नियम ज़रूरी हैं — लेकिन जब उन्हें समय पर लागू किया जाता है, और पहले से proper crew-management + contingency plan नहीं होते — तो वो नियम भारी असुविधा का कारण बन जाते हैं।
- इस घटना ने स्पष्ट कर दिया कि हवा में यात्रा पर भरोसा सिर्फ विमान और पायलट पर नहीं — बल्कि पूरी व्यवस्था, नियामक, एयरलाइन्स की तैयारी, और पारदर्शिता पर निर्भर करता है।
निष्कर्ष — IndiGo Crisis: सिर्फ एक एयरलाइन नहीं, पूरे सिस्टम की परीक्षा
IndiGo Flight Crisis 2025 — यह सिर्फ एक एयरलाइन की भूल या mismanagement नहीं। यह एक चेतावनी है — कि जब एक एयरलाइन देश की अधिकांश हवाई यात्रा संभाले, और safety / regulatory बदलाव हो — तो व्यवस्था मजबूत और जवाबदेह होनी चाहिए।
वर्ना, —
➡️ रद्द उड़ानें,
➡️ आसमान छूता किराया,
➡️ हताश यात्री,
➡️ उड़ चुकी भरोसेमंद हवाई यात्रा —
और अंततः — आम जनता की परेशानी।
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