पहाड़ी माइक ब्यूरो: उत्तराखंड में बिजली की कीमतों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। ऊर्जा निगम बोर्ड की बैठक में बिजली दरों में 16.23% बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। अब प्रस्ताव नियामक आयोग के पास भेजा जाएगा, जिसके बाद नई दरें लागू होने की संभावना है।
यह बढ़ोतरी बिजली कंपनियों के बढ़ते खर्च, लाइन लॉस और उत्पादन लागत के चलते की जा रही है। यानी उपभोक्ताओं की जेब अब पहले से ज्यादा ढीली होगी।
उत्तराखंड में बिजली की बढ़ती दरों का सीधा असर अब आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। जहां घरेलू उपभोक्ता बढ़े हुए बिलों से परेशान होंगे, वहीं छोटे व्यवसायों (hotel, Restaurants, small startup) और दुकानदारों के लिए यह फैसला और भी भारी पड़ सकता है। बिजली खर्च में 16.23% की बढ़ोतरी से उनकी मासिक लागत बढ़ेगी, जिससे मुनाफा कम होगा और कई कारोबारियों को अतिरिक्त खर्च अपने ग्राहकों पर डालना पड़ सकता है। बढ़ती महंगाई, किराया, और अब बिजली बिल—ये सभी छोटे व्यापारों को कठिन स्थिति में खड़ा कर रहे हैं।
कौन-सा स्लैब कितना महंगा होगा?
नए प्रस्ताव के अनुसार—
400 यूनिट से अधिक उपयोग पर 1.25 रुपये प्रति यूनिट अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा।
उदाहरण के तौर पर:
पहले
300 यूनिट → ₹1,800 – ₹2,120
अब
300 यूनिट → ₹3,650 – ₹3,780 तक (अनुमानित)
अर्थात ₹1,500–₹1,800 तक बिजली बिल में वृद्धि संभव।
जिसके पास ज्यादा उपभोग, उसके लिए ज्यादा असर
जो घर, होटल, रिसॉर्ट या दुकानें हर महीने 500 यूनिट से ऊपर बिजली खर्च करती हैं, उन्हें यह वृद्धि सबसे ज्यादा प्रभावित करेगी।
25 साल में तीन गुना हो गया बिजली बिल
समाचार के अनुसार—
2001 → ₹1.80 से ₹2.20 प्रति यूनिट
2025 → ₹7.80 से ₹8.50 प्रति यूनिट तक पहुँचने की आशंकायह बढ़ोतरी 2001 के मुकाबले तीन गुना से भी अधिक है।
आयोग द्वारा सुझाव और सुनवाई अभी बाकी
यह प्रस्ताव अब आयोग की सार्वजनिक सुनवाई से गुजरेगा।
यदि आयोग ने इसे पास कर दिया, तो—
👉 नए दरें वर्ष 2025-26 से लागू होंगी
👉 ग्रामीण एवं शहरी उपभोक्ताओं पर अलग प्रभाव पड़ेगा
👉 औद्योगिक उपयोगकर्ताओं पर बड़ा भार पड़ेगाराज्य गठन से आज तक उपभोक्ता-बोझ (आँकड़े)
वर्ष उपभोक्ता संख्या उत्पादन क्षमता (MW) 2001 6.47 लाख 1536 2007 9.29 लाख 3000 से अधिक 2024 23.60 लाख 5750 से अधिक
यहाँ बड़ा अंतर स्पष्ट है—
👉 उपभोक्ता संख्या तीन गुना
👉 मांग चार गुना
👉 उत्पादन सीमित
नतीजा—
बिजली खरीद पर निर्भरता बढ़ी और शुल्क में बढ़ोतरी तय।
तुलना देखें – उत्तराखंड अब भी सबसे सस्ता?
| राज्य | घरेलू दरें (₹/unit) |
|---|---|
| उत्तराखंड | 6.16 – 8.23 |
| यूपी | 8.87 – 12.50 |
| दिल्ली | 2.60 – 8.00 |
| राजस्थान | 8.25 – 13.00 |
| महाराष्ट्र | 9.47 – 15.31 |
उत्तराखंड की दरें अभी भी कई राज्यों से कम बताई जा रही हैं।
मुख्य कारण क्या बताया गया?
ऊर्जा निगम के अनुसार—
✔ बिजली खरीद लागत में तेजी
✔ ट्रांसमिशन और वितरण खर्च में वृद्धि
✔ पुराने ढांचे के सुधार की लागत
✔ लोन एवं ब्याज भुगतान
ऊर्जा निगम ने यह दावा भी किया है कि नई दरों के बाद भी उत्तराखंड, हिमाचल और अन्य राज्यों की तुलना में सस्ती बिजली ही उपलब्ध रहेगी।
लोगों की प्रतिक्रिया – सवाल और चिंता
✔ क्या यह बढ़ोतरी बिजली कंपनियों की गलती का भार जनता पर डालना है?
✔ क्या उत्पादन क्षमता को नहीं बढ़ाया जा सकता?
✔ क्या सरकार निजी खरीद कम कर स्वनिर्माण को बढ़ाएगी?
“जब बिजली उत्पादन तीन गुना नहीं बढ़ा है, फिर बिल तीन गुना कैसे बढ़ गया?
इसका मतलब व्यवस्था में पारदर्शिता की जरूरत है।”
निष्कर्ष
उत्तराखंड में जल्द ही बिजली दरें बदल सकती हैं।
बढ़ोतरी का सीधा असर—
आम घरेलू उपभोक्ता
छोटे दुकानदार
होटल/रिसॉर्ट
औद्योगिक उपभोक्ता पर पड़ेगा।
वहीं सरकार और निगम का दावा है कि इससे प्रणाली सुधारने, बिजली खरीद कम करने और जनता को लंबे समय में स्थिर सप्लाई देने में मदद मिलेगी।
अब फैसला नियामक आयोग की सुनवाई और अंतिम मंजूरी पर निर्भर है।
यूपीसीएल द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार बिजली दरों में 16.23% बढ़ोतरी प्रस्तावित है। अधिक जानकारी या आधिकारिक घोषणा यहां देखी जा सकती है — click here
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