1 करोड़ का इनामी नक्सली हिड़मा ढेर — नक्सलवाद पर अब तक का सबसे बड़ा झटका

हिड़मा नक्सली

आंध्र प्रदेश: नक्सलवादी प्रभावित जंगलों का मास्टरमाइंड हिड़मा और उसकी पत्नी हुई ढेर, सेना द्वारा नक्सलवाद पर अब तक की सबसे बड़ी चोट ।

Highlights

  • 1 करोड़ का इनामी नक्सली माड़वी हिड़मा एनकाउंटर में ढेर
  • छत्तीसगढ़-ओडिशा बॉर्डर के मेड़ेलीफिल्ला जंगल में ऑपरेशन
  • 100 से अधिक नक्सली वारदातों में शामिल, पत्नी भी मारी गई
  • 25 साल से सक्रिय हिड़मा कोर कमेटी का महत्वपूर्ण सदस्य
  • पिछले 12 साल में नक्सल प्रभावित ज़िलों की संख्या 182 से घटकर 11

अगर आप सोचते हैं कि नक्सलवाद अब खत्म होने के कगार पर है, तो यह खबर उस दिशा में एक और बड़ा कदम है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा की बॉर्डर के घने जंगलों में एक ऑपरेशन हुआ, और इसमें सुरक्षा बलों ने उस शख्स को खत्म कर दिया जिसने 25 वर्षों तक नक्सलवाद की रीढ़ की हड्डी बनकर काम किया — माड़वी हिड़मा
हाँ, वही हिड़मा, जिस पर 1 करोड़ रुपये का इनाम था और जिसका नाम सुनकर सुरक्षा एजेंसियाँ भी अलर्ट पर आ जाती थीं।

लाल आतंक पर सबसे बड़ा प्रहार: 1 करोड़ का इनामी हिड़मा ढेर

छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा पर सुरक्षा बलों ने नक्सल मोर्चे पर अब तक की सबसे महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। कुख्यात और 1 करोड़ का इनामी नक्सली माड़वी हिड़मा को एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया गया।
हिड़मा लगभग 25 वर्षों से नक्सल संगठन का सबसे प्रभावशाली चेहरा रहा था और अनेक बड़ी वारदातों का मास्टरमाइंड माना जाता था।

हिड़मा के बारे में कहा जाता था कि उसे जंगलों का ऐसा ज्ञान था कि सुरक्षा बल कितनी भी तैयारी कर लें, वह बचकर निकल जाता था। इसीलिए उसे पकड़ना लगभग असंभव माना जाता था।

लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।

रेड कॉरिडोर का क्या मतलब है, और यह क्यों घट रहा है?

भारत का नक्सल प्रभावित इलाक़ा यानी रेड कॉरिडोर, 2013 में 182 ज़िलों में फैला हुआ था।
आज यह सिर्फ 11 ज़िले रह गए हैं।

यानी पिछले 12 साल में नक्सलवाद लगभग समाप्ति के मोड में है।

हिड़मा की मौत इस पूरी प्रक्रिया में एक माइलस्टोन है।
क्योंकि वह नक्सल नेटवर्क का वो हिस्सा था जो लगातार नए हमले प्लान करता था और संगठन को एक्टिव रखता था।

हिड़मा कौन था? – 25 साल का आतंक का सफर

  • हिड़मा 16 साल की उम्र में नक्सल संगठन से जुड़ा
  • अपनी क्रूरता और रणनीति के कारण कोर कमेटी तक पहुँचा
  • PGL (People’s Guerrilla Leader) के रूप में कई जिलों में आतंक फैलाया
  • पिछले 25 साल में इसके खिलाफ 100 से अधिक मामले दर्ज
  • पुलिस और CRPF पर किए गए कई घातक हमलों का मास्टरमाइंड

ऑपरेशन कैसे हुआ?

मेड़ेलीफिल्ला के जंगलों में खुफिया इनपुट मिला कि हिड़मा अपनी यूनिट के साथ मूव कर रहा है।
ऑपरेशन शुरू हुआ।
जवाब मिलने लगा।
मुठभेड़ तेज हुई।

और इसी दौरान सुरक्षा बलों ने हिड़मा को घेरकर मार गिराया।
उसकी पत्नी—जो संगठन में सक्रिय थी—वह भी मुठभेड़ में मारी गई।

यह घटना सिर्फ एक एनकाउंटर नहीं है।
यह नक्सलवाद की जड़ों में लगी एक सर्जिकल स्ट्राइक की तरह है।

हिड़मा के अपराध — देश को हिला देने वाली दो घटनाएँ

1. ताड़मेटला हमला (2010)

76 CRPF जवान शहीद।
भारतीय सुरक्षा इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में से एक।
इस पूरे ऑपरेशन का मास्टरमाइंड—हिड़मा

2. झीरम घाटी हमला (2013)

छत्तीसगढ़ कांग्रेस की पूरी पहली लाइन एक हमले में खत्म।
32 बड़े नेता मारे गए।
उस वक्त भी नाम सामने आया—हिड़मा।

इन घटनाओं के बाद हिड़मा भारत के सबसे वांटेड नक्सलियों की लिस्ट में नंबर 1 हो गया था।

सवाल: क्या इससे नक्सलवाद खत्म हो जाएगा?

पूरी तरह खत्म? शायद नहीं।
लेकिन कमजोर? बहुत ज्यादा।

क्योंकि—

  • हिड़मा जैसी रणनीतिक क्षमता वाला नेता नक्सलियों के पास फिर से तैयार करना आसान नहीं है।
  • ऑपरेशन अब लगातार और सटीक हो रहे हैं।
  • नक्सली इलाकों में विकास कार्य बढ़ रहे हैं।
  • लोग भी अब संगठन से दूर जा रहे हैं।

यानी अगर इसे नक्सलवाद पर फाइनल बटन न भी कहें, तो भी यह नक्सल संगठन के लिए सबसे बड़ा झटका जरूर है।

निष्कर्ष: यह सिर्फ एक एनकाउंटर नहीं, एक संकेत है

भारत उस दौर से निकल रहा है जहाँ जंगलों में छिपे कुछ गुरिल्ला कमांडर पूरे देश को चुनौती दे रहे थे।
हिड़मा का मारा जाना उसी बदलाव का प्रतीक है।

और हाँ—जब भी भारत की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते हैं, ऐसी सफलताएँ बताती हैं कि जमीनी स्तर पर काफी कुछ बदल चुका है।

नक्सलवाद की कहानी अभी खत्म नहीं हुई,
लेकिन इसका अंतिम अध्याय ज़रूर शुरू हो चुका है।


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