उत्तरकाशी ITI की हकीकत: एक ही ट्रेड चल रहा, सिर्फ 5 छात्र —और स्टाफ 7

उत्तरकाशी आईटीआई

उत्तरकाशी: चिन्यालिसौर स्थित ITI में 2013 से बनी इमारत में केवल एक ही ट्रेड सक्रिय है; सिर्फ पाँच छात्र नामांकित और सात स्टाफ — स्थानीय लोगों ने उठाये सवाल! क्या सरकारी योजनाएँ कागज़ों तक सीमित हैं?

संस्थान का उद्देश्य और वास्तविकता

उत्तरकाशी ज़िले के चिन्यालिसौर (बंचौरा) स्थित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) को 2013 में स्थानीय युवाओं को रोज़गार आधारित कौशल प्रशिक्षण देने के लिए शुरू किया गया था। लेकिन आज यह संस्थान सिर्फ़ एक ही ट्रेड — “फ़िटर” — तक सीमित रह गया है।

यहाँ फिलहाल सिर्फ़ पाँच छात्र प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जबकि सात कर्मचारी तैनात हैं। इस असंतुलन ने संस्थान की उपयोगिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कम दाखिले और बंद ट्रेड

शुरुआत में इस ITI को इलेक्ट्रिशियन, वेल्डर और फ़िटर — तीन ट्रेडों की स्वीकृति मिली थी।
वर्तमान में दो ट्रेड पूरी तरह बंद हैं और केवल फ़िटर ट्रेड चालू है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, जब तक सभी स्वीकृत ट्रेडों को पुनः शुरू नहीं किया जाएगा, तब तक इस संस्थान का उद्देश्य अधूरा रहेगा।

स्थानीय प्रतिक्रिया और प्रशासनिक बयान

प्राचार्य नीलम सैनी ने बताया कि ITI वर्तमान में SCVT (State Council for Vocational Training) से संबद्ध है और NCVT (National Council for Vocational Training) संबद्धता हेतु प्रस्ताव भेजा गया है।
उन्होंने आशा जताई कि मंज़ूरी मिलते ही नए ट्रेड शुरू किए जा सकेंगे और दाखिला बढ़ेगा।

वहीं सामाजिक कार्यकर्ता विवेक बिष्ट का कहना है —

“यदि संस्थान सही तरीके से चलाया जाए और सभी ट्रेड शुरू किए जाएँ, तो यह युवाओं और महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का बड़ा केंद्र बन सकता है।”

स्थानीय निवासी राजेन्द्र सिंह रांगड़ ने कहा —

“यह ITI आज सिर्फ़ औपचारिकता बनकर रह गया है। अगर सरकार वास्तव में पलायन रोकना चाहती है, तो ऐसे संस्थानों को पुनर्जीवित करना होगा।” (TOI REPORT)

संभावित सुधार:

  • नए ट्रेड जैसे सोलर टेक्नोलॉजी, मोबाइल रिपेयरिंग, कंप्यूटर बेसिक, महिला सिलाई प्रशिक्षण शुरू किए जाएँ।
  • स्थानीय उद्योगों और संस्थानों से इंटर्नशिप व प्लेसमेंट की व्यवस्था हो।

पहाड़ी दृष्टिकोण से क्यों ज़रूरी है?

उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में शिक्षा के साथ स्थानीय रोजगार ही पलायन रोकने की असली कुंजी है।
अगर चिन्यालिसौर ITI जैसे संस्थानों को सशक्त किया जाए, तो युवाओं को बाहर नौकरी की तलाश में नहीं जाना पड़ेगा।

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