रवि किशन ने 34 साल बाद जीता पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड — ‘लापता लेडीज’ में बेहतरीन अभिनय के लिए मिला सम्मान

“Ravi Kishan wins Filmfare Award 2025 lapata ladies award winning movie

फिल्मफेयर अवॉर्ड्स 2025 की चमकती शाम भोजपुरी सुपरस्टार रवि किशन के नाम रही। 34 साल लंबे संघर्ष और 750 से ज़्यादा फिल्मों में काम करने के बाद आखिरकार वह दिन आया जब उनके नाम की गूंज इस प्रतिष्ठित मंच पर सुनाई दी। उन्हें फिल्म ‘लापता लेडीज’ के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर (मेल) का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला — और यह क्षण सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उनकी मेहनत और जुनून की जीत का प्रतीक बन गया।

2025 के फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में इतिहास बना: भोजपुरी स्टार रवि किशन की शानदार जीत

फिल्मफेयर अवॉर्ड्स 2025 की रात बॉलीवुड के लिए तो यादगार रही ही, लेकिन सबसे भावुक पल तब आया जब भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार रवि किशन ने पहली बार अपने नाम फिल्मफेयर ट्रॉफी की।
फिल्म ‘लापता लेडीज’ में उनके शानदार अभिनय ने उन्हें Best Supporting Actor (Male) का अवॉर्ड दिलाया।

इस कैटेगरी में परेश रावल, पंकज त्रिपाठी और आर. माधवन जैसे बड़े नाम भी थे, लेकिन रवि किशन ने 34 साल के लंबे इंतज़ार के बाद ये ट्रॉफी अपने नाम कर ली।

“34 साल… पर सपना जिंदा रहा”

अवॉर्ड लेते वक्त रवि किशन की आंखें भर आईं। उन्होंने मंच पर कहा —

“34 साल हो गए इस इंडस्ट्री में… पर सपना कभी मरा नहीं। आज यह ट्रॉफी मेरे संघर्ष की कहानी बोल रही है।”

यह वाक्य पूरे हॉल में गूंज उठा। उनकी भावनाओं में उन तमाम कलाकारों का दर्द और उम्मीद झलक रही थी जो वर्षों से अपने मौके का इंतज़ार कर रहे हैं।

‘लापता लेडीज’ ने दिखाया रवि किशन का नया रंग

“Ravi Kishan wins Filmfare Award 2025 for Laapataa Ladies holding trophy on stage”

किरण राव द्वारा निर्देशित ‘Laapataa Ladies’ साल 2025 की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक रही।
फिल्म में रवि किशन ने एक पुलिस अफसर की भूमिका निभाई — जो कहानी में हास्य और संवेदनशीलता दोनों का मिश्रण लाता है।

उनकी परफॉर्मेंस को क्रिटिक्स और दर्शकों दोनों ने सराहा। सोशल मीडिया पर भी लोग कह रहे हैं —

“रवि किशन ने साबित कर दिया कि सच्ची मेहनत और टैलेंट को पहचान मिलकर रहती है।”

दिग्गजों के बीच बाज़ी मारी

इस कैटेगरी में परेश रावल, पंकज त्रिपाठी, आर. माधवन जैसे मजबूत दावेदार थे, लेकिन रवि किशन ने सभी को पछाड़ते हुए अवॉर्ड अपने नाम किया।
यह जीत सिर्फ एक अभिनेता की सफलता नहीं, बल्कि उन कलाकारों की कहानी भी है जो सीमित संसाधनों से आगे बढ़कर हिंदी सिनेमा के केंद्र तक पहुँचते हैं।

भोजपुरी से बॉलीवुड तक का सफर आसान नहीं था

रवि किशन ने 1990 के दशक में भोजपुरी सिनेमा से शुरुआत की और धीरे-धीरे हिंदी फिल्मों में अपनी जगह बनाई।
‘लापता लेडीज’ की सफलता ने यह साबित किया कि क्षेत्रीय सिनेमा से आने वाला कलाकार भी राष्ट्रीय पहचान हासिल कर सकता है — बस मेहनत और भरोसा जरूरी है।

मंच पर भावुक हुए रवि किशन — बोले “सपना था ये पल देखने का”

ट्रॉफी लेते वक्त रवि किशन की आंखें नम थीं। उन्होंने कहा —

“मैंने 34 साल इंतज़ार किया इस स्टेज पर आने का। 750 फिल्मों में काम किया, लेकिन उम्मीद कभी छोड़ी नहीं।”

उनका ये बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर “#RaviKishan” ट्रेंड करने लगा।

इंडस्ट्री में प्रतिक्रियाएं

अवॉर्ड जीतने के बाद सोशल मीडिया पर रवि किशन की तारीफों की बौछार हो गई।
कई सितारों ने लिखा —

“यह सिर्फ अवॉर्ड नहीं, मेहनत का उत्सव है।”
“भोजपुरी सिनेमा के लिए यह गर्व का क्षण है।”

उनकी यह उपलब्धि क्षेत्रीय सिनेमा के कलाकारों के लिए भी बड़ी प्रेरणा बन गई है।

निष्कर्ष — “मेहनत का रंग एक दिन ज़रूर दिखता है”

रवि किशन की जीत ने एक बार फिर साबित किया कि समय लग सकता है, पर सच्ची प्रतिभा को पहचान मिलकर रहती है।
उनका 34 साल का सफर एक संदेश देता है —

“अगर सपना सच्चा है, तो रास्ता कितना भी लंबा क्यों न हो, मंज़िल मिलकर रहती है।”

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