पहाड़ी माइक ब्यूरो: भारत के इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व हैं जिनकी जीवन गाथा पीढ़ियों तक प्रेरणा देती रहती है। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम उन्हीं में से एक हैं — एक महान वैज्ञानिक, शिक्षक, लेखक और भारत के पूर्व राष्ट्रपति, जिन्हें पूरा देश स्नेह से “मिसाइल मैन” और “जनता के राष्ट्रपति” के नाम से जानता है।
एक कहानी जो बताती है – क्यों अब्दुल कलाम सिर्फ एक नाम नहीं, एक विचार हैं
साल था 1958। मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अब्दुल कलाम के सामने दो रास्ते थे —
पहला, वे वायुसेना (Indian Air Force) में पायलट बन सकते थे, और दूसरा, वे वैज्ञानिक के रूप में काम कर सकते थे।
उन्होंने सपना देखा था — “आसमान को छूने” का। लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंज़ूर था।
वायुसेना की परीक्षा में वे नौवें स्थान पर आए, जबकि सिर्फ आठ उम्मीदवारों का चयन हुआ।
वे टूट गए, मन में निराशा थी।
तभी वे ऋषिकेश के स्वामी शिवानंद से मिलने गए।
स्वामीजी ने बस इतना कहा —
“बेटा, अगर तुम्हें उड़ना है, तो पंख नहीं — विचारों की ज़रूरत है।
”यही शब्द उनकी पूरी ज़िंदगी का मंत्र बन गए।वे लौटे, और ठान लिया कि वे भारत को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से ऊँचाइयों पर ले जाएंगे।
सालों बाद, जब भारत ने अग्नि मिसाइल को सफलतापूर्वक लॉन्च किया,तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा — “भगवान ने मुझे पायलट नहीं बनाया, लेकिन अब मैं एक ऐसे देश को उड़ाना सिखा रहा हूँ जो कभी झुका नहीं।”
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
अवुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम (तमिलनाडु) के एक साधारण मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनके पिता जैनुलाब्दीन एक नाव चलाने का कार्य करते थे और माता आशिअम्मा गृहिणी थीं।परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, लेकिन कलाम के भीतर ज्ञान की प्यास और कुछ कर दिखाने की लगन बहुत प्रबल थी।उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रामेश्वरम के स्कूल से पूरी की और फिर सेंट जोसेफ कॉलेज, तिरुचिरापल्ली से भौतिकी में स्नातक किया। इसके बाद वे मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने लगे। यहीं से उनके जीवन की दिशा विज्ञान और प्रौद्योगिकी की ओर मुड़ गई।
वैज्ञानिक के रूप में योगदान
पढ़ाई पूरी करने के बाद कलाम ने डीआरडीओ (DRDO) में वैज्ञानिक के रूप में कार्य करना शुरू किया, लेकिन जल्द ही उन्हें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में नियुक्त किया गया।वहीं उन्होंने भारत के पहले उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (SLV-III) के विकास में अहम भूमिका निभाई, जिसने रोहिणी उपग्रह को अंतरिक्ष में स्थापित किया — यह भारत की अंतरिक्ष यात्रा की ऐतिहासिक शुरुआत थी।
1980 और 1990 के दशक में उन्होंने इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IGMDP) का नेतृत्व किया। इस कार्यक्रम के तहत ‘अग्नि’, ‘प्रिथ्वी’, ‘त्रिशूल’ और ‘आकाश’ जैसी मिसाइलें विकसित की गईं। इसी कारण उन्हें “मिसाइल मैन ऑफ इंडिया” की उपाधि मिली।
भारत के राष्ट्रपति: “जनता के राष्ट्रपति
“डॉ. कलाम को वर्ष 2002 में भारत का 11वां राष्ट्रपति चुना गया। वे पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने इस उच्चतम संवैधानिक पद को संभाला।उनका राष्ट्रपति कार्यकाल (2002–2007) जनता के बीच अत्यंत लोकप्रिय रहा। उन्होंने राष्ट्रपति भवन के दरवाजे छात्रों और आम लोगों के लिए खोल दिए, जिससे यह “जनता का राष्ट्रपति भवन” कहलाने लगा।कलाम हमेशा कहते थे — “अगर आप सूरज की तरह चमकना चाहते हैं, तो पहले सूरज की तरह जलना सीखिए।”उनका विनम्र स्वभाव, सरल जीवनशैली और युवाओं के प्रति असीम प्रेम ने उन्हें हर भारतीय के दिल में अमर बना दिया।
लेखक और प्रेरक व्यक्तित्व

वैज्ञानिक और राष्ट्रपति होने के साथ-साथ डॉ. कलाम एक प्रखर लेखक और विचारक भी थे। उनकी प्रसिद्ध पुस्तकों में शामिल हैं:
- “विंग्स ऑफ फायर” (आत्मकथा)
- “इग्नाइटेड माइंड्स”
- “इंडिया 2020: अ विज़न फॉर द न्यू मिलेनियम”
- “माय जर्नी”
इन पुस्तकों ने न केवल लाखों युवाओं को प्रेरित किया, बल्कि भारत के भविष्य की दिशा पर गहरा प्रभाव डाला। उनका सपना था — “साल 2020 तक भारत एक विकसित राष्ट्र बने।”
अंतिम क्षण और विरासत
27 जुलाई 2015 को शिलांग (मेघालय) में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में व्याख्यान देते समय ही डॉ. कलाम का निधन हो गया। वे अंतिम क्षण तक युवाओं को प्रेरित कर रहे थे।उनकी मृत्यु के बाद पूरा देश शोक में डूब गया, लेकिन उनकी शिक्षाएँ, विचार और योगदान आज भी हर भारतीय को दिशा दिखाते हैं।
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के प्रेरणादायक विचार
- “सपना वो नहीं जो आप नींद में देखते हैं, सपना वो है जो आपको सोने नहीं देता।”
- “महान सपनों के बिना कोई महान व्यक्ति नहीं बन सकता।”
- “हमें हार नहीं माननी चाहिए और समस्या को हमें हराना नहीं चाहिए।”
- “आपका भविष्य आपके हाथों में है — इसे मजबूत बनाइए।”
सम्मान और पुरस्कार
- भारत रत्न (1997) – भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान
- पद्म भूषण (1981)पद्म विभूषण (1990)
- सैकड़ों विश्वविद्यालयों से मानद डॉक्टरेट की उपाधि
भारत रत्न (1997) – भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण (1981)पद्म विभूषण (1990)सैकड़ों विश्वविद्यालयों से मानद डॉक्टरेट की उपाधि
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम फाउंडेशन: युवा और शिक्षा के लिए प्रेरणा
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम फाउंडेशन की स्थापना उनके आदर्शों और दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए की गई थी। इसका मकसद युवा पीढ़ी को शिक्षा, विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में प्रेरित करना है। फाउंडेशन के कार्यक्रम और कार्यशालाएँ छात्रों और युवा वैज्ञानिकों को सशक्त बनाते हैं, ताकि वे देश की प्रगति में योगदान दे सकें और कलाम जी के विज़न को साकार कर सकें।
निष्कर्ष:
“एक सच्चे भारतवासी की अमर प्रेरणा”डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सपने, मेहनत और ईमानदारी के बल पर कोई भी व्यक्ति असंभव को संभव बना सकता है।वो केवल एक वैज्ञानिक या राष्ट्रपति नहीं थे — वे एक विचार थे, जो हर भारतीय के दिल में बसते हैं।“कलाम साहब ने हमें उड़ान भरना सिखाया — और बताया कि हर भारतीय के भीतर एक पंख होता है, बस विश्वास चाहिए।”
सोनम वांगचुक की Biography यहां पढ़िए
ए.पी.जे. अब्दुल कलाम कौन थे?
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक, शिक्षक और 11वें राष्ट्रपति थे। उन्हें “मिसाइल मैन ऑफ इंडिया” के नाम से जाना जाता है।
अब्दुल कलाम को मिसाइल मैन क्यों कहा जाता है?
क्योंकि उन्होंने भारत के मिसाइल विकास कार्यक्रम — जैसे अग्नि, प्रिथ्वी, आकाश, और त्रिशूल — में अहम भूमिका निभाई थी।
ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
डॉ. कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम, तमिलनाडु में हुआ था।
डॉ. अब्दुल कलाम की शिक्षा कहाँ से हुई थी?
उन्होंने सेंट जोसेफ कॉलेज, तिरुचिरापल्ली से भौतिकी में स्नातक किया और मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की।
ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की प्रसिद्ध किताबें कौन-सी हैं?
Wings of Fire”, “Ignited Minds”, “India 2020”, और “My Journey”।
अब्दुल कलाम को भारत रत्न कब मिला था?
डॉ. अब्दुल कलाम को 1997 में भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” प्रदान किया गया।
डॉ. अब्दुल कलाम के प्रेरणादायक विचार कौन से हैं?
उनका प्रसिद्ध कथन है —“सपना वो नहीं जो आप नींद में देखते हैं, सपना वो है जो आपको सोने नहीं देता।”
ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की मृत्यु कब और कैसे हुई?
27 जुलाई 2015 को शिलांग (मेघालय) में IIM शिलांग में व्याख्यान देते समय उन्हें हृदयाघात हुआ और उनका निधन हो गया।
अब्दुल कलाम का सपना क्या था?
उनका सपना था — भारत को वर्ष 2020 तक एक विकसित राष्ट्र बनाना और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना।
डॉ. अब्दुल कलाम से हमें क्या सीख मिलती है?
उनके जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि गरीबी, असफलता या परिस्थितियाँ कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं, अगर हमारे अंदर सपने देखने और मेहनत करने का साहस है।
डॉ. अब्दुल कलाम की जन्म एवं मृत्यु तिथि ?
जन्म तिथि: October 15, 1931
मृत्यु तिथि: July 27, 2015
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को भारत रत्न कब मिला ?
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को भारत रत्न वर्ष 1997 में दिया गया था। यह भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, और उन्हें यह पुरस्कार विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान तथा रक्षा अनुसंधान और मिसाइल विकास में अहम भूमिका निभाने के लिए दिया गया था। उन्हें “मिसाइल मैन ऑफ इंडिया” भी कहा जाता है।







