नैनीताल की 14 वर्षीय नाबालिग ने बच्ची को जन्म दिया। आरोपी सूरज गिरफ्तार, POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज। घटना 3 अक्टूबर 2025 की सुबह। पढ़ें पूरी खबर..
हाइलाइट्स (Highlights)
- 14 साल 10 महीने की नाबालिग ने नैनीताल के बीडी पांडे अस्पताल में बच्ची को जन्म दिया।
- आरोपी को बच्ची के जन्म की जानकारी मिलते ही मिठाई बांटते समय पुलिस ने गिरफ्तार किया।
- आरोपी और पीड़िता की पहचान फेसबुक के जरिए हुई थी।
- आरोपी सूरज अल्मोड़ा जिले का रहने वाला और नैनीताल के रेस्टोरेंट में काम करता था।
- पॉक्सो एक्ट और आईपीसी की धाराओं में मुकदमा दर्ज।
घटना की पूरी जानकारी (Full Story)
नैनीताल से आई इस खबर ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर कर रख दिया है। शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2025 की सुबह एक नाबालिग छात्रा ने बीडी पांडे जिला अस्पताल में बच्ची को जन्म दिया। पीड़िता की उम्र महज़ 14 साल 10 महीने है और वह कक्षा 9 की छात्रा है। घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को सूचित किया। इसी दौरान, आरोपी सूरज भी अस्पताल पहुंच गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि उसने बच्ची के जन्म पर खुशी जताते हुए वहां मौजूद लोगों को मिठाई बांटनी शुरू कर दी। यह घटना शनिवार, 4 अक्टूबर 2025 को स्थानीय मीडिया में सामने आई।
लेकिन तभी अस्पताल प्रशासन की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को वहीं से गिरफ्तार कर लिया।
घटना का खुलासा और पुलिस कार्रवाई
पुलिस पूछताछ में यह सामने आया कि आरोपी और किशोरी की पहचान करीब दो साल पहले फेसबुक (Facebook) पर हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और आरोपी ने किशोरी का यौन शोषण किया। इसी के चलते पीड़िता गर्भवती हो गई। सूरज, अल्मोड़ा जिले के शीतलाखेत का रहने वाला है और नैनीताल में एक रेस्टोरेंट में काम करता था।
पुलिस ने आरोपी सूरज के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
सामाजिक चिंता और सवाल
यह मामला न केवल समाज के सामने सोशल मीडिया पर रिश्तों के खतरनाक परिणाम को उजागर करता है, बल्कि उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में लड़कियों की सुरक्षा और जागरूकता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
- सोशल मीडिया के गलत उपयोग से मासूम बच्चियों का शोषण होना एक बड़ी समस्या बन रही है।
- नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा और शिक्षा के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
- स्थानीय प्रशासन और समाज को मिलकर ऐसे मामलों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
निष्कर्ष (Conclusion)
नैनीताल का यह मामला समाज के लिए चेतावनी है कि कैसे सोशल मीडिया की दोस्ती खतरनाक मोड़ ले सकती है। नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना परिवार, समाज और प्रशासन तीनों की जिम्मेदारी है। इस तरह की घटनाएं स्थानीय प्रशासन और कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आती हैं।
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