सोनम वांगचुक: लद्दाख के नवप्रवर्तनकारी और शिक्षा क्रांतिकारी

Sonam wangchuk सोनम वांगचुक biography

लद्दाख के छोटे गाँव से निकले सोनम वांगचुक ने NIT श्रीनगर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और यूरोप में जाकर किए ऐसे नवाचार जो Ice Stupa और SECMOL जैसी परियोजनाओं में बदल गए। उनकी शिक्षा और नवाचार की सोच ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों तक पहुँचाया। बॉलीवुड फिल्म “3 इडियट्स” के फुन्सुख वांगडू का किरदार उनकी प्रेरक कहानी से प्रेरित है।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

सोनम वांगचुक

सोनम वांगचुक का जन्म 1966 में लद्दाख के एक छोटे गाँव में हुआ। बचपन में उन्हें सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा अपने गाँव में प्राप्त की और बाद में एनआईटी श्रीनगर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद यूरोप में सस्टेनेबल और मिट्टी-आधारित वास्तुकला का अध्ययन किया।

उनके प्रारंभिक अनुभवों ने यह समझने में मदद की कि शिक्षा और तकनीकी नवाचार को स्थानीय जीवन के अनुरूप होना चाहिए।

SECMOL: Students’ Educational and Cultural Movement of Ladakh शिक्षा में क्रांति

सोनम ने SECMOL की स्थापना की ताकि छात्रों को रटंत शिक्षा की बजाय व्यावहारिक और तकनीकी शिक्षा दी जा सके। SECMOL में छात्रों को स्थानीय भाषा, संस्कृति, तकनीकी कौशल और ऊर्जा संरक्षण के प्रशिक्षण के साथ पढ़ाया जाता है। इस मॉडल ने कई छात्रों को अपने गांवों में नेतृत्व और नवाचार की भूमिका निभाने के लिए सक्षम बनाया।

SECMOL के प्रमुख पहलु

  • छात्रों को स्थानीय भाषा, संस्कृति और तकनीकी कौशल सिखाना
  • ऊर्जा संरक्षण और सोलर एनर्जी परियोजनाओं में प्रशिक्षण
  • छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके गाँवों में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार करना

SECMOL छात्रों की सफलता की कहानियाँ

  1. डोल्मा — सौर ऊर्जा परियोजनाओं में कार्यरत, अपने गाँव में स्वावलंबन लाया।
  2. तनमिन — Ice Stupa परियोजना में प्रशिक्षण लेकर अपने गाँव में जल संरक्षण लागू किया।
  3. कई छात्र अब इंजीनियर, शिक्षक और सामाजिक उद्यमी बन चुके हैं।

Ice Stupa: कृत्रिम ग्लेशियर

सोनम वांगचुक का सबसे प्रसिद्ध नवाचार Ice Stupa है। यह एक कृत्रिम ग्लेशियर है जो सर्दियों में पानी को जमा करता है और गर्मियों में धीरे-धीरे पिघलकर किसानों को सिंचाई का पानी देता है। Ice Stupa ने लद्दाख के किसानों की जल-सुरक्षा में क्रांतिकारी बदलाव लाया और पर्यावरण के अनुकूल समाधान प्रदान किया।

तकनीकी विवरण

  • पानी को ऊँचाई पर नलियों के माध्यम से पहुंचाया जाता है।
  • हवा में पानी फटकर बर्फ बनाता है और पिरामिड जैसी संरचना में जमा होता है।
  • गर्मियों में धीरे-धीरे पिघलकर खेतों में पानी पहुँचता है।

लाभ

  • कम लागत में जल संग्रहण
  • पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ
  • स्थानीय युवाओं के लिए प्रशिक्षण और रोजगार
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करना

Ice Stupa ने लद्दाख के किसानों की सिंचाई समस्या का स्थायी समाधान प्रस्तुत किया।

अन्य नवाचार और परियोजनाएँ

  • सोलर एनर्जी सिस्टम — ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति।
  • मिट्टी-आधारित निर्माण — किफायती और पर्यावरण-अनुकूल घर।
  • स्थानीय स्वावलंबन — युवाओं को व्यावहारिक कौशल और रोजगार के अवसर।

पुरस्कार और सम्मान

सोनम वांगचुक को उनके कार्यों के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। इन पुरस्कारों से यह साबित होता है कि उनका काम सिर्फ लद्दाख तक सीमित नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सराहा गया।

  1. Ramon Magsaysay Award (2018): शिक्षा और समाज सेवा में उनके क्रांतिकारी नवाचार और SECMOL और Ice Stupa परियोजनाओं के लिए।
  2. Rolex Awards for Enterprise (2016): हिमालयी क्षेत्र में जल संरक्षण और टिकाऊ विकास के लिए उनके अविश्वसनीय आविष्कारों के लिए।
  3. Global Award for Sustainable Architecture (2017): पर्यावरण-अनुकूल और मिट्टी आधारित निर्माण एवं वास्तुकला नवाचार के लिए।
  4. Honorary D.Litt. — Symbiosis International (2018): शिक्षा सुधार और समाज सेवा में उनके अद्वितीय योगदान के लिए।
  5. Eminent Technologist of the Himalayan Region — IIT Mandi (2018): हिमालयी क्षेत्र में तकनीकी नवाचार और टिकाऊ परियोजनाओं के लिए।
  6. Indians for Collective Action (ICA) Honor Award (2017): ग्रामीण समुदायों और छात्रों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए।
  7. GQ Men of the Year — Social Entrepreneur of the Year (2017): समाज सेवा और नवाचार में अग्रणी उद्यमिता के लिए।
  8. International Terra Award / Terra Prize (Best Earth Building, 2016): मिट्टी आधारित निर्माण और पर्यावरणीय वास्तुकला के उत्कृष्ट कार्य के लिए।
  9. Real Heroes Award — CNN-IBN (2008): समाज और शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरक और असाधारण योगदान के लिए।
  10. Green Teacher Award — Sanctuary Asia (2004): पर्यावरण संरक्षण और छात्रों को स्थायी शिक्षा देने के लिए।
  11. Ashoka Fellowship (2002): सामाजिक नवाचार और लीडरशिप के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए।
  12. Man of the Year — The Week (2001): लद्दाख में शिक्षा और समाज सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए।
  13. Governor’s Medal for Educational Reform, Jammu & Kashmir (1990s): शिक्षा सुधार और छात्रों के लिए व्यावहारिक पाठ्यक्रम लागू करने के लिए।

व्यक्तिगत जीवन और चुनौतियाँ

सोनम वांगचुक ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया। लद्दाख का कठोर मौसम, सीमित संसाधन और प्रशासनिक चुनौतियाँ उनके रास्ते में रुकावटें थीं। इसके बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी शिक्षा और नवाचार परियोजनाओं को आगे बढ़ाया। उनका जीवन यह संदेश देता है कि कठिनाइयों के बावजूद ठोस सोच और सामाजिक प्रतिबद्धता से बड़ा बदलाव संभव है।

फिल्म “3 इडियट्स” और सोनम वांगचुक

बॉलीवुड फिल्म “3 इडियट्स” के फुन्सुख वांगडू का किरदार सोनम वांगचुक के वास्तविक जीवन से प्रेरित है। फिल्म ने दर्शकों को दिखाया कि शिक्षा केवल परीक्षा और मार्क्स तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि नवाचार, प्रयोग और समाज सेवा भी शिक्षा का अहम हिस्सा हैं। सोनम की सोच और उनकी शिक्षा प्रणाली को फिल्म ने व्यापक पहचान दी और युवाओं को प्रेरित किया।

आज के समय में हम देखते हैं कि भारत के अधिकतर प्रतिभाशाली और उच्च शिक्षित युवा अमेरिका, कनाडा या यूके जैसे विकसित देशों का रुख कर लेते हैं और वहीं जाकर अपना योगदान देते हैं। इसे हम “ब्रेन ड्रेन” कहते हैं, जहाँ देश की प्रतिभा विदेशों में जाकर बस जाती है। लेकिन इसी दौर में सोनम वांगचुक एक अलग मिसाल बनकर सामने आए। उन्होंने चाहें तो विदेशों में रहकर अपने आविष्कारों से बड़ी सफलता पा सकते थे, लेकिन उन्होंने अपने लद्दाख और भारत को ही कर्मभूमि चुना। अपने देश की समस्याओं को ही चुनौती मानकर उन्होंने Ice Stupa जैसे जल संरक्षण के अनोखे आविष्कार किए और SECMOL जैसी संस्था के माध्यम से हजारों छात्रों की जिंदगी बदली। यही कारण है कि वे सिर्फ एक वैज्ञानिक या इंजीनियर नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माता और सच्चे कर्मयोगी कहलाते हैं।

Click here for more..

Share:

WhatsApp
Telegram
Facebook
Twitter
LinkedIn