UKSSSC ग्रुप C परीक्षा पेपर लीक 2025: मेहनत करने वाले छात्रों के सपनों पर फिर चोट

Uksssc paper leak 2025

देहरादून, 21 सितंबर 2025 – उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की ग्रुप C भर्ती परीक्षा एक बार फिर विवादों में घिर गई है। परीक्षा के दौरान पेपर लीक होने की खबर सामने आई, जिससे लाखों उम्मीदवारों का भविष्य एक बार फिर सवालों में है। छात्रों का कहना है कि यह सिर्फ एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि उनकी मेहनत, सपनों और करियर से खिलवाड़ है।

घटना क्रम 21 सितंबर 2025 (परीक्षा का दिन)

रविवार को आयोजित स्नातक स्तर की ग्रुप C परीक्षा सुबह 11 बजे शुरू हुई थी। लेकिन शुरू होने के सिर्फ 30–35 मिनट बाद ही पेपर के कुछ पन्ने सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। जब परीक्षा खत्म हुई और छात्रों ने अपने प्रश्न-पत्र की तुलना वायरल पन्नों से की, तो उसमें कई सवाल बिल्कुल समान पाए गए।

यह घटना उन युवाओं के लिए बेहद निराशाजनक रही, जिन्होंने महीनों तक इस परीक्षा की तैयारी की थी।

आयोग की प्रतिक्रिया

आयोग का कहना है कि यह “पूरी तरह से पेपर लीक” नहीं है, बल्कि सिर्फ कुछ पन्ने बाहर आए हैं!

लेकिन छात्रों और विशेषज्ञों का मानना है कि चाहे पूरा पेपर लीक हो या कुछ हिस्सा – न्यायसंगत प्रतियोगिता पर इसका गहरा असर पड़ता है।

2021 में भी UKSSSC स्नातक परीक्षा लीक होने के बाद रद्द करनी पड़ी थी। अब 2025 में दोबारा वही हालात बनने से छात्र खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

छात्रों का गुस्सा और दर्द

  • देहरादून के एक परीक्षार्थी ने कहा – “हम दिन-रात पढ़ाई करते हैं, लेकिन हर बार पेपर लीक होने की वजह से मेहनत बेकार जाती है। आखिर जिम्मेदारी कौन लेगा?”
  • हल्द्वानी से आए अभ्यर्थी बोले – “यह सिर्फ नकल माफिया का खेल नहीं, बल्कि सिस्टम की कमजोरी है। जब तक दोषियों को कड़ी सजा नहीं मिलेगी, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।

”सोशल मीडिया पर भी #UKSSSC_PaperLeak, #उत्तराखंड_घोटाला जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।

फीस और बेरोजगारी का बोझ

उत्तराखंड में हर साल लाखों युवा सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं। आवेदन शुल्क, किताबें, कोचिंग और यात्रा का खर्चा पहले ही छात्रों पर भारी पड़ता है। ऐसे में पेपर लीक की घटनाएं न सिर्फ उनकी मेहनत बल्कि आर्थिक बोझ को भी बढ़ा देती हैं।कई अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर यह परीक्षा रद्द हुई तो उन्हें फिर से फीस भरनी पड़ेगी, जिससे गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले छात्रों पर डबल प्रेशर पड़ेगा।

आयोग और सरकार पर सवाल

यह कोई पहली बार नहीं है कि UKSSSC पेपर लीक की घटना सामने आई है। साल 2021 में भी इसी ग्रुप–C परीक्षा को पेपर लीक की वजह से रद्द करना पड़ा था। उस समय सरकार ने बड़ी सख्ती और जांच के दावे किए थे, लेकिन 2025 में फिर वही घटना दोहराई गई।छात्रों का कहना है कि –“अगर सिस्टम इतना मजबूत है तो पेपर बार-बार कैसे लीक हो जाता है? क्या हमारी मेहनत और भविष्य सिर्फ नकल माफिया के हाथों में है?”

नकल विरोधी कानून पर उठे सवाल

उत्तराखंड सरकार ने 2023 में नकल विरोधी कानून लागू किया था, जिसे उस समय छात्रों ने स्वागत योग्य कदम माना था। इस कानून का मकसद था कि किसी भी भर्ती परीक्षा में अगर पेपर लीक या नकल जैसी घटनाएं होती हैं तो दोषियों को कड़ी सजा और भारी जुर्माना दिया जाएगा। लेकिन 21 सितंबर 2025 की UKSSSC ग्रुप–C पेपर लीक घटना ने इस कानून की मजबूती पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।छात्रों का कहना है कि जब सख्त कानून मौजूद है तो फिर बार-बार पेपर कैसे लीक हो रहे हैं? आखिर किनकी लापरवाही या मिलीभगत से ये घटनाएं हो रही हैं? कई युवाओं ने सोशल मीडिया पर लिखा कि –“सिर्फ कानून बनाने से कुछ नहीं होता, जब तक उसे ईमानदारी और निष्पक्षता से लागू न किया जाए।”विशेषज्ञों का मानना है कि कानून तो मजबूत है, लेकिन इसकी असली चुनौती है प्रभावी क्रियान्वयन। अगर हर पेपर लीक के बाद सिर्फ कुछ गिरफ्तारियां हों और बड़े मास्टरमाइंड्स तक कार्रवाई न पहुंचे, तो नकल माफिया का नेटवर्क कभी खत्म नहीं होगा।अब यह देखना होगा कि सरकार और जांच एजेंसियां इस बार नकल विरोधी कानून के तहत कितनी सख्ती दिखाती हैं और क्या यह कदम छात्रों का भरोसा वापस जीत पाएगा या नहीं

Home

Share:

WhatsApp
Telegram
Facebook
Twitter
LinkedIn