भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने हाल ही में बड़ा फैसला लेते हुए उत्तराखंड की 11 पंजीकृत अमान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) की मान्यता रद्द कर दी है। आयोग का यह निर्णय उन दलों पर लागू हुआ है जिन्होंने पिछले छह वर्षों में न तो लोकसभा चुनाव और न ही विधानसभा चुनावों में हिस्सा लिया। यह खबर उत्तराखंड राजनीति और देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है।
उत्तराखंड की राजनीति पर असर
उत्तराखंड में राजनीतिक पार्टियों की संख्या तो अधिक है लेकिन सक्रिय राजनीति में मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) का दबदबा है।
इन 11 दलों की मान्यता समाप्त होने से राज्य की मुख्यधारा की राजनीति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन यह साफ है कि निर्वाचन आयोग अब सख्त है और निष्क्रिय पार्टियों पर नकेल कस रहा है।
कौन-कौन सी पार्टियों की मान्यता रद्द हुई?
निर्वाचन आयोग ने जिन 11 राजनीतिक दलों की मान्यता रद्द की, उनके नाम इस प्रकार हैं:
- भारत कौमी दल
- भारत परिवार पार्टी (हरिद्वार)
- भारतीय मूल निवासी समाज पार्टी (देहरादून)
- भारतीय सम्राट सुभाष सेना (हरिद्वार)
- भारतीय अन्तोदय पार्टी (देहरादून)
- भारतीय ग्राम नगर विकास पार्टी (देहरादून)
- गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रन्ट (देहरादून)
- पीपल्स पार्टी (हरिद्वार)
- प्रजातन्त्र पार्टी ऑफ इंडिया (नैनीताल)
- सुराज सेवा दल (नैनीताल)
- उत्तराखंड जनशक्ति पार्टी (देहरादून)।
यह सभी दल “Registered Unrecognized Political Parties (RUPPs)” की श्रेणी में आते थे
क्यों की गई कार्रवाई?
- Representation of the People Act, 1951 की धारा 29A के अनुसार, जो भी पंजीकृत राजनीतिक दल लगातार छह वर्षों तक किसी भी लोकसभा या विधानसभा चुनाव में हिस्सा नहीं लेते, उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है।
- आयोग के अनुसार, इन दलों ने न तो चुनावों में सक्रिय भागीदारी की और न ही समय-समय पर आवश्यक वित्तीय रिपोर्ट और गतिविधि विवरण प्रस्तुत किया।
- इस कदम का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया से निष्क्रिय और निष्क्रियता का दुरुपयोग करने वाले दलों को हटाना है।
इससे पहले भी हुई थी कार्रवाई
- हाल ही में निर्वाचन आयोग ने 6 राजनीतिक दलों को डीलिस्ट किया था।
- अब इन 11 दलों के साथ मिलाकर उत्तराखंड से कुल 17 राजनीतिक दलों की मान्यता समाप्त हो चुकी है।
- पूरे भारत में सैकड़ों ऐसी पार्टियों पर निगरानी रखी जा रही है जो केवल नाम के लिए पंजीकृत हैं लेकिन चुनावी गतिविधियों में भाग नहीं लेतीं।
चुनाव आयोग की पारदर्शिता की दिशा में कदम
- फर्जी या निष्क्रिय दलों को हटाने से मतदाताओं में विश्वास बढ़ेगा।
- राजनीतिक फंडिंग की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
- सक्रिय और जनता से जुड़े दल ही आगे चुनाव प्रक्रिया में बने रहेंगे।
जनता की प्रतिक्रिया
ग्रामीण और शहरी इलाकों में आम जनता का मानना है कि यह फैसला सही है क्योंकि कई बार ऐसे निष्क्रिय दल केवल चंदा वसूली और लाभ लेने के लिए बने रहते हैं। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से चुनाव आयोग की साख और मजबूत होगी।
भारत निर्वाचन आयोग का यह फैसला चुनाव सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम है। उत्तराखंड की 11 पार्टियों की मान्यता समाप्त होना यह दर्शाता है कि अब आयोग केवल उन्हीं राजनीतिक दलों को मान्यता देगा जो सक्रिय रूप से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं। इससे आने वाले समय में राजनीतिक व्यवस्था और ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बनने की उम्मीद है।






