टिहरी गढ़वाल में भारी बारिश का कहर: गोठ गाँव और सकलाना में तबाही, 10 मजदूर लापता

cloudburst in tehri garhwal uttarakhand

उत्तराखंड एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की चपेट में है। बीते कई दिनों से लगातार हो रही बारिश ने लोगों की जिंदगी मुश्किल बना दी है। टिहरी गढ़वाल ज़िले के कई इलाकों में स्थिति गंभीर होती जा रही है। खासकर धनोल्टी के गोठ गाँव और सकलाना क्षेत्र में कल रात भारी बारिश ने तबाही मचाई। कहीं पहाड़ टूटकर रास्तों को बंद कर रहा है तो कहीं मलबा घरों में घुस गया। सबसे बड़ा हादसा गोठ गाँव में हुआ, जहाँ से बाहर से काम करने आए लगभग 10 मजदूरों के लापता होने की खबर है

गोठ गाँव में बादल फटने जैसी स्थिति

स्थानीय लोगों के अनुसार धनोल्टी के गोठ गाँव में देर रात तेज गर्जना के साथ बारिश शुरू हुई। थोड़ी ही देर में पानी का तेज बहाव मलबे के साथ गाँव की ओर आ गया। घरों के अंदर कीचड़ और पत्थर भर गए। वहीं गौशालाओं में बंधे कई मवेशी भी इसकी चपेट में आ गए। ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना किसी बादल फटने जैसी ही थी, क्योंकि पानी और मलबे का बहाव इतना तेज था कि लोग संभल भी नहीं पाए।

सबसे दुखद पहलू यह रहा कि गाँव में काम करने आए मजदूरों का अचानक कोई पता नहीं चला। बताया जा रहा है कि वे सभी उस समय गाँव के किनारे झोपड़ी जैसी अस्थायी ठिकानों में थे, जो मलबे के साथ बह गए। अब तक 10 मजदूरों की कोई जानकारी नहीं मिल पाई है

ग्रामीण खुद कर रहे रेस्क्यू

गोठ गाँव के लोग इस घटना से दहशत में हैं। चारों तरफ कीचड़, पत्थर और पानी का जमाव है। स्थानीय ग्रामीण खुद ही रेस्क्यू में जुटे हैं। कई लोग पूरी रात टॉर्च लेकर लापता मजदूरों और पशुओं को खोजने की कोशिश करते रहे। हालात ऐसे हैं कि लोग बाहर से किसी मदद का इंतजार करने के बजाय अपने स्तर पर राहत कार्य करने को मजबूर हैं।

गाँव वालों का कहना है कि प्रशासन की ओर से अभी तक कोई बड़ी मदद मौके पर नहीं पहुँची है। जबकि यह इलाका चारों तरफ से नदी–नालों से घिरा हुआ है और स्थिति लगातार बिगड़ रही है।

सकलाना क्षेत्र में पहाड़ दरका, सड़कें बंद

टिहरी गढ़वाल का सकलाना क्षेत्र भी बारिश से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। भुत्सी वार्ड नंबर 10 में पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा। इसके साथ भारी मात्रा में मलबा भी नीचे आया जिसने कई गाड़ियों को दबा दिया। लोगों के घरों के पास तक मलबा भर गया है।

सड़क मार्ग भी पूरी तरह बाधित हो गया है। खासकर मरोड़ा से लामकाण्डे गाँव को जोड़ने वाली सड़क जगह-जगह टूट गई है। इससे गाँव के लोग बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। वाहन और ट्रैक्टर तक कीचड़ और पत्थरों में दब गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन जल्द ही सड़क खोलने की व्यवस्था नहीं करता तो आवश्यक सामान जैसे खाने-पीने की चीजें और दवाइयाँ गाँव तक पहुँचाना मुश्किल हो जाएगा।

हर साल दोहराई जाती है त्रासदी

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में हर साल बारिश के मौसम में ऐसी त्रासदियाँ सामने आती हैं। कभी बादल फटने से तबाही होती है, तो कभी भूस्खलन और मलबे से गाँव तबाह हो जाते हैं। टिहरी गढ़वाल का इलाका तो खासतौर पर इस लिहाज़ से संवेदनशील माना जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में मजबूत सुरक्षा इंतजाम और समय पर चेतावनी सिस्टम का होना बेहद जरूरी है। लेकिन अफसोस की बात है कि प्रशासन तब ही सक्रिय होता है जब कोई बड़ी आपदा हो जाती है।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

गोठ गाँव और सकलाना में बारिश से हुई तबाही के बाद ग्रामीण लगातार मदद की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन अब तक राहत दल मौके पर नहीं पहुँच पाया है। सवाल यह है कि जब उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों को आपदा-प्रवण ज़ोन माना जाता है तो फिर प्रशासनिक मशीनरी तुरंत सक्रिय क्यों नहीं होती?

लोगों का कहना है कि अगर समय पर एसडीआरएफ या राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुँचती तो शायद लापता मजदूरों को खोजने का काम और तेजी से हो सकता था।

सोशल मीडिया पर मदद की अपील

गाँव के लोग मोबाइल नेटवर्क की समस्या के बावजूद सोशल मीडिया के माध्यम से मदद की अपील कर रहे हैं। कई लोगों ने गोठ गाँव और सकलाना की तस्वीरें और वीडियो साझा किए हैं, जिनमें साफ दिख रहा है कि किस तरह मलबा घरों के अंदर तक घुस गया है।

स्थानीय संगठनों और स्वयंसेवकों ने भी राहत कार्य शुरू करने की बात कही है। उम्मीद है कि जल्द ही प्रशासन भी सक्रिय होकर मौके पर पहुँचेगा।

भविष्य के लिए सबक

यह घटना हमें एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में आपदा प्रबंधन को लेकर और गंभीर कदम उठाने होंगे।

  • गाँवों के पास रिलीफ शेल्टर बनाए जाएं।
  • समय से पहले चेतावनी सिस्टम स्थापित किया जाए।
  • नदी–नालों और भूस्खलन प्रवण क्षेत्रों में सुरक्षा दीवार और ड्रेनेज सिस्टम मजबूत किया जाए।
  • ग्रामीणों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाए ताकि वे शुरुआती समय में खुद को और दूसरों को बचा सकें।

निष्कर्ष

टिहरी गढ़वाल के गोठ गाँव और सकलाना में हुई तबाही एक बड़ी चेतावनी है। लगातार हो रही भारी बारिश ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पहाड़ों में आपदा कभी भी दस्तक दे सकती है। लापता मजदूरों की तलाश जारी है और ग्रामीण प्रशासन की ओर उम्मीद लगाए बैठे हैं।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उत्तराखंड सरकार और प्रशासन इस घट

Share:

WhatsApp
Telegram
Facebook
Twitter
LinkedIn